मान्यता है कि 8वीं सदी में आदि गुरु शंकराचार्य इस क्षेत्र में आए थे। यहां उन्हें दिव्य ज्ञान ज्योति की प्राप्ति हुई थी। दिव्य ज्ञान ज्योति और ज्योतेश्वर महादेव की वजह से इस स्थान को ज्योतिर्मठ का नाम दिया गया था।
उत्तराखंड में चमोली जिले की जोशीमठ तहसील को अब उसके प्राचीन नाम ज्योतिर्मठ से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीते वर्ष चमोली जिले के घाट में आयोजित कार्यक्रम में जोशीमठ का नाम बदलकर ज्योतिर्मठ करने की घोषणा की थी।
बता दें कि स्थानीय जनता लंबे समय से जोशीमठ को ज्योतिर्मठ नाम दिए जाने की मांग कर रही थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने भी यह मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। मुख्यमंत्री धामी ने इसे गंभीरता से लेते हए नाम परिवर्तन का फैसला लिया मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप प्रस्ताव बनाकर भारत सरकार को भेज दिया गया था। अब ये है मान्यता कि 8वीं सदी में आदि गुरु शंकराचार्य इस क्षेत्र में आए थे। उन्होंने अमर कल्प वृक्ष के नीचे तपस्या की थी, जिससे उन्हें दिव्य ज्ञान ज्योति की प्राप्ति हुई थी। दिव्य ज्ञान ज्योति और ज्योतेश्वर महादेव की वजह से इस स्थान को ज्योतिर्मठ का नाम दिया गया, लेकिन यह जोशीमठ के नाम से ही प्रचलित हो गया। इसके बाद नाम बदलने की मांग की बार प्रमुखता से उठी, लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका।केंद्र ने ज्योतिर्मठ तहसील के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार के फैसले का स्थानीय जनता ने स्वागत किया है।
शंकराचार्य जी महाराज के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया और तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष रोहिणी रावत जी और तत्कालीन ब्लाक प्रमुख प्रकाश रावत जी को शुभकामनाएं प्रेषित की । सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी के इस कार्य की प्रशंसा करके उनके इस कार्य की प्रशंसा की ।
इस अवसर पर उपस्थित रहे मुकुन्दानन्द ब्रह्मचारी , विष्णुप्रियानन्द ब्रह्मचारी, महिमानन्द उनियाल, जगदीश उनियाल, अभिषेक बहुगुणा, नरेशानन्द नौटियाल, वैभव सकलानी , रीनू देवी, आशीष उनियाल, निर्मल कुमार आदि लोग उपस्थित रहे ।
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