देहरादून, जैन धर्म के प्रमुख पर्व दसलक्षण पर्व का शुभारंभ आज देहरादून में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ। भक्तों ने परम पूज्य संस्कार प्रणेता, ज्ञानयोगी, जीवन आशा हॉस्पिटल प्रेरणा स्तोत्र, उत्तराखंड के राजकीय अतिथि आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महामुनिराज के मंगल सान्निध्य में प्रातःकाल जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा की। इस पुण्य अवसर पर शांतिधारा का सौभाग्य विमल कुमार जैन को प्राप्त हुआ।
प्रातः 6:00 बजे से श्री स्वयंभू चौबीसी महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में देव आज्ञा, गुरु आज्ञा, आचार्य निमंत्रण, मंडप शुद्धि, ध्वजारोहण एवं श्री जी का अभिषेक विधानाचार्य संदीप जैन सजल (हस्तिनापुर) के मार्गदर्शन में संपन्न हुए। संगीत की मधुर प्रस्तुतियाँ केशव एंड पार्टी (भोपाल) द्वारा दी गईं।
इस धार्मिक विधान में मुख्य पात्र बनने का सौभाग्य क्रमशः –
आर. के. जैन – बीना जैन
अमित जैन – दीपा जैन
आशीष जैन – सीमा जैन
राहुल जैन – मुकता जैन
को प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर भगवान महावीर स्वामी एवं पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महामुनिराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन जैन समाज अध्यक्ष श्री विनोद कुमार जैन, संदीप जैन, मधु जैन, अमित जैन, आशीष जैन, अशोक जैन एवं अन्य गुरुभक्तों द्वारा किया गया।
उत्तम क्षमा धर्म प्रवचन
दसलक्षण धर्म के प्रथम दिन “उत्तम क्षमा धर्म” पर प्रवचन करते हुए पूज्य आचार्य श्री ने कहा –
“धर्म सदा एक होता है, केवल धर्मात्मा बदलते हैं। क्षमा कोई केवल विचार नहीं, बल्कि आचरण है। इसे जीवन में सहजता से अपनाना चाहिए, जिससे जीवन में शांति, सुख और समृद्धि बनी रहे।”
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
संध्याकाल में जिनवाणी जाग्रति मंच की महिलाओं द्वारा “उपसर्ग से मोक्ष तक” नामक प्रेरणादायक नाटिका का मंचन किया गया। इसमें सुकुमाल मुनि के वैराग्य, पांडवों का तप, दुर्योधन के भांजे द्वारा उपसर्ग तथा केवलज्ञान एवं मोक्ष की प्राप्ति की घटनाओं को भावनात्मक और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया।
नियमित आयोजन
प्रत्येक दिवस सायं 6:00 बजे प्रतिक्रमण एवं आरती श्री मंदिर जी में आयोजित की जाएगी।
