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श्री सत्य साईं बाबा शताब्दी समारोह में गूंजा ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का संदेश”

By: Naveen Joshi

On: Sunday, November 23, 2025 8:09 PM

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देहरादून,  श्री सत्य साईं मंदिर, सुभाष नगर में आयोजित श्री सत्य साईं बाबा के शताब्दी समारोह में भक्तों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सुबह से ही आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 6 बजे ॐकार, सुप्रभात तथा नगर संकीर्तन से हुआ। इसके बाद 10:30 बजे लक्षार्चना, हवन और भजन का आयोजन किया गया। दोपहर 12 बजे प्रसाद भोग और 12:30 बजे नारायण सेवा सम्पन्न हुई। कार्यक्रम का समापन दोपहर 1 बजे मंगल आरती के साथ हुआ।

 

समारोह में नरेश धीर ,दिनेश, चांद बल्लभ, डबराल जी, सहगल, बी.के. चौधरी, बिना जोशी, राधावल्लभ, सोनिया धीर और कादंबरी शर्मा सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

अध्यक्ष ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि “श्री सत्य साईं बाबा का यह जन्मशताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी पीढ़ी के लिए दिव्य वरदान है। भले ही वे हमारे बीच भौतिक रूप में नहीं हैं, लेकिन उनका प्रेम, उनकी सेवा भावना और उनकी शिक्षा आज भी करोड़ों लोगों का मार्गदर्शन कर रही है।”

 

उन्होंने आगे कहा कि “श्री सत्य साईं बाबा का जीवन ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का वास्तविक स्वरूप था। इसलिए यह शताब्दी वर्ष सार्वभौमिक प्रेम, शांति और सेवा का महापर्व बन गया है। इस अवसर पर मैं सभी भक्तों और नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।”

 

अध्यक्ष ने बताया कि श्री सत्य साईं बाबा का संदेश सीमाओं तक सीमित नहीं है। “उनकी शिक्षा का प्रभाव आज गांव-गांव, शहर-शहर दिखाई देता है। संस्कार, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में जो सेवा प्रवाह देशभर में दिख रहा है, वह बाबा की शिक्षाओं का जीवंत प्रमाण है। मानव सेवा ही माधव सेवा—यह उनके अनुयायियों का सबसे बड़ा आदर्श है।”

 

श्री सत्य साईं अस्पतालों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “जब कोई गरीब परिवार पहली बार इन अस्पतालों में आता है, तो यह देखकर आश्चर्यचकित रह जाता है कि यहां बिलिंग का कोई काउंटर ही नहीं है। इलाज पूरी तरह निःशुल्क है, और मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होती। इससे अनगिनत परिवारों की बेटियों की शिक्षा और उनका सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित हुआ है।” कार्यक्रम का समापन भक्तों द्वारा सेवा, सद्भाव और मानवता के पथ पर चलने के संकल्प के साथ हुआ।

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