देहरादून, । भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लंबित वादों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से आगामी 21, 22 एवं 23 अगस्त 2026 को सर्वोच्च न्यायालय परिसर, नई दिल्ली में विशेष लोक अदालत “समाधान समारोह” का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन “सुलह का संकल्प-न्याय का विकल्प” की भावना पर आधारित होगा, जिसके माध्यम से विभिन्न प्रकार के वादों के समाधान हेतु पक्षकारों को एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया जाएगा।
गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय, देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट सीमा डुंगराकोटी ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि इस विशेष लोक अदालत में सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित लंबित दीवानी एवं वैवाहिक वाद, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, चेक अनादरण (चेक बाउंस) मामले, भूमि अधिग्रहण प्रकरण, श्रम विवादों सहित विभिन्न प्रकार के आपराधिक मामलों का निस्तारण आपसी सहमति एवं सुलह के आधार पर किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि समाधान समारोह के माध्यम से वादकारियों को लंबी एवं जटिल न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलेगी तथा कम समय एवं न्यूनतम व्यय में मामलों का अंतिम निपटारा संभव हो सकेगा। साथ ही, पक्षकारों की आपसी सहमति से विवादों के समाधान को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बन सके।
न्यायिक मजिस्ट्रेट सीमा डुंगराकोटी ने बताया कि जिन वादकारियों के मामले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं, वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून से संपर्क कर अपने प्रकरणों के संबंध में आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति, उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून सहयोगी संस्थाओं के रूप में कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि “समाधान समारोह-2026” का उद्देश्य न्याय को आमजन तक सहज एवं सुलभ रूप में पहुंचाना तथा सहमति आधारित न्याय व्यवस्था को प्रोत्साहित करना है। सर्वोच्च न्यायालय परिसर, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में वादकारी एवं उनके अधिवक्ता सुलह वार्ता में प्रतिभाग कर अपने मामलों के निस्तारण की दिशा में प्रभावी पहल कर सकेंगे।





