चमोली (प्रदीप लखेड़ा)। उच्च हिमालय में स्थित पवित्र तीर्थ लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान लक्ष्मण के दर्शन कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी से सटे इस पवित्र तीर्थ के कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। अब शनिवार को सिखों के प्रमुख तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ हिंदू-सिख एकता की अद्भुत मिसाल माने जाते हैं। दोनों तीर्थ अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक महत्व के कारण देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं।
भ्यूंडार घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी वादियों और दुर्लभ वनस्पतियों के लिए विश्वभर में जानी जाती है। मान्यता है कि महाभारत काल में गंधमादन पर्वत की यात्रा के दौरान द्रौपदी को ब्रह्मकमल पुष्प प्रिय लगने पर महाबली भीम इसी क्षेत्र से ब्रह्मकमल लेकर आए थे। कहा जाता है कि वर्तमान हेमकुंड क्षेत्र वही स्थान है, जहां से भीम ने द्रौपदी के लिए पुष्प एकत्र किए थे। आज भी यहां बड़ी मात्रा में ब्रह्मकमल पाए जाते हैं।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट एक ही दिन खोले जाते थे, लेकिन इस बार लक्ष्मण मंदिर के कपाट एक दिन पहले खोले गए हैं। शनिवार को हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने के साथ ही देश-विदेश से पहुंचे सिख श्रद्धालु मत्था टेकेंगे।






