चमोली ( प्रदीप लखेड़ा )
प्राचीन पाण्डुलिपियां, ताड़पत्र, भोजपत्र एवं दुर्लभ अभिलेख हमारी समृद्ध ज्ञान परम्परा, सांस्कृतिक विरासत एवं बौद्धिक चेतना के अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण एवं भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित हस्तांतरण को लेकर जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में शनिवार को जिला कार्यालय स्थित वीसी कक्ष में जनपद स्तरीय “ज्ञान भारतम् मिशन” के अन्तर्गत राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में उपलब्ध प्राचीन पाण्डुलिपियों एवं दुर्लभ ग्रन्थों का व्यवस्थित चिन्हीकरण एवं संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में बताया गया कि “ज्ञान भारतम् मिशन” भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसके तहत देशभर में भारतीय ज्ञान परम्परा से जुड़ी पाण्डुलिपियों एवं दुर्लभ ग्रन्थों का वैज्ञानिक संरक्षण, सूचीकरण, डिजिटलीकरण एवं अभिलेखीकरण किया जा रहा है। मिशन का उद्देश्य प्राचीन ज्ञान धरोहर को सुरक्षित रखते हुए शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं आमजन के लिए सुलभ बनाना है। उत्तराखण्ड राज्य भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद स्तर पर सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों तथा ऐसे व्यक्तियों का चिन्हीकरण किया जाए जिनके पास पाण्डुलिपियां, हस्तलिखित ग्रन्थ, ताड़पत्र, भोजपत्र अथवा अन्य दुर्लभ अभिलेख उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि संस्था अथवा व्यक्ति का नाम, सम्पर्क विवरण एवं उपलब्ध पाण्डुलिपियों की अनुमानित संख्या सहित विस्तृत सूची तैयार कर राज्य अभिलेखागार को उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनके संरक्षण एवं डिजिटलीकरण की कार्यवाही की जा सके।
बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि “ज्ञान भारतम् मिशन” के अन्तर्गत पाण्डुलिपियां एवं ग्रन्थ संबंधित संग्रहकर्ता संस्था अथवा व्यक्ति के अधिकार में ही सुरक्षित रहेंगे तथा मिशन का उद्देश्य केवल उनका संरक्षण एवं डिजिटलीकरण करना है। मिशन के प्रभावी संचालन हेतु मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी को जनपद स्तरीय नोडल अधिकारी नामित किया गया है।






