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हर परिवार की बनेगी डिजिटल पहचान, योजनाओं का लाभ पहुंचाना होगा आसान

By: Naveen Joshi

On: Monday, November 2, 2026 6:59 PM

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने  मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ का भी विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों पहलें प्रदेश में सुशासन को मजबूत करने, सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने और राज्य के दीर्घकालिक विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सरकार की सफलता का वास्तविक पैमाना योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना है। जानकारी के अभाव में कई बार पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। वहीं, अलग-अलग विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा करने और कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। देवभूमि परिवार पोर्टल इन समस्याओं को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने बाबा केदार की पावन भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया था। इसी संकल्प से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए प्रयासरत है।

विकसित उत्तराखंड विजन-2047 केवल लक्ष्यों का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास की विस्तृत कार्ययोजना है। इसके लिए सभी विभागों और जनपदों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समयबद्ध कार्ययोजनाएं तैयार करनी होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सड़क, रेल, हवाई संपर्क और आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और चारधाम सड़क परियोजना से कनेक्टिविटी को मजबूती मिल रही है। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों के साथ मानसखंड मंदिर माला मिशन तथा धार्मिक पर्यटन से जुड़ी अन्य परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। शीतकालीन यात्रा के माध्यम से वर्षभर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि औद्योगिक निवेश, स्वरोजगार और स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने के साथ स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। प्रदेश में तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था डेढ़ गुना से अधिक बढ़ चुकी है। पिछले एक वर्ष में प्रदेश की जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रतिव्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि और रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी राज्य में हो रहे बदलावों को दर्शाती है। सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय रोजगार व आजीविका के अवसर बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का विकास मॉडल ‘प्रकृति के साथ प्रगति’ की अवधारणा पर आधारित होना चाहिए। हिमालय, नदियां, वन संपदा और सांस्कृतिक विरासत प्रदेश की पहचान हैं। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य होने के कारण प्रत्येक विकास योजना में पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों की नियमित समीक्षा और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

परिवारों को मिलेगी विशिष्ट डिजिटल आईडी
प्रमुख सचिव नियोजन डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि देवभूमि परिवार पोर्टल का उद्देश्य प्रदेश के परिवारों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है। इसके माध्यम से परिवारों और उनके सदस्यों की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। पोर्टल पर पंजीकरण के बाद प्रत्येक परिवार को विशिष्ट ‘देवभूमि परिवार आईडी’ प्रदान की जाएगी।

इससे पात्र लाभार्थियों की पहचान, विभागों के बीच समन्वय और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। साथ ही नागरिकों को बार-बार दस्तावेज जमा करने और अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। पोर्टल के संचालन के लिए राज्य स्तर पर देवभूमि परिवार प्राधिकरण और जिला स्तर पर जिला देवभूमि परिवार अधिकारी की व्यवस्था प्रस्तावित है।

28 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
प्रमुख सचिव ने बताया कि विकसित उत्तराखंड विजन-2047 में लगभग 440 संकेतकों के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक विकास लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। वर्ष 2047 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लगभग 28 लाख करोड़ रुपये और प्रतिव्यक्ति आय को करीब 20 लाख रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके साथ ही बेरोजगारी दर को 3.5 प्रतिशत और बहुआयामी गरीबी को 0.61 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

विजन में कृषि, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास, कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2047 तक राज्य की स्थापित ऊर्जा क्षमता को लगभग 22 हजार मेगावाट और वन आच्छादन को 46.6 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2030, 2035, 2040, 2047 और 2050 के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय किए गए हैं। इनके आधार पर विभागीय कार्ययोजनाएं तैयार करने और नियमित समीक्षा की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सरकार, प्रशासन और जनभागीदारी के सामूहिक प्रयासों से उत्तराखंड विकसित राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा और विकसित भारत के संकल्प में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और खजान दास, विधायक सविता कपूर, सेतु आयोग के सलाहकार दिनेश अग्रवाल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सेतु आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक डॉ. सोनिया पंत, आदित्य कुमार सहित जनप्रतिनिधि और शासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विभिन्न जनपदों के जिलाधिकारी और जिला स्तरीय अधिकारी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में जुड़े।

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