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उत्तराखंडधर्म–संस्कृति

भारतीय नेपाली ब्राह्मण समिति का वार्षिक स्थापना महोत्सव एवं विश्व शांति शतचंडी महायज्ञ

देहरादून,भारतीय नेपाली ब्राह्मण समिति द्वारा उनके वार्षिक स्थापना महोत्सव के शुभ अवसर पर तीन दिवसीय विश्व शांति शतचंडी महायज्ञ का आयोजन काली मंदिर, लाडपुर में किया गया। यह धार्मिक आयोजन विधिवत मंत्रोच्चारण, वेदपाठ, हवन, दुर्गा सप्तशती पाठ एवं भव्य आरती के साथ प्रारंभ हुआ।
शतचंडी महायज्ञ एक अत्यंत शक्तिशाली एवं पवित्र अनुष्ठान है, जिसमें दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। यह यज्ञ विश्व शांति, सुख-समृद्धि, और आध्यात्मिक कल्याण के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। मान्यता है कि इस यज्ञ से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और भक्तों को देवी की कृपा प्राप्त होती है। इस अवसर पर समिति के सदस्य एवं विद्वान पंडितों द्वारा स्वस्तिवाचन एवं दुर्गा सप्तशती पाठ किया गया, जो कि धार्मिक अनुष्ठानों का प्रमुख भाग है। समिति के अध्यक्ष राम प्रसाद मरासीनी ने सभी सदस्यों के साथ मिलकर माँ भगवती का पूजन एवं आरती की।
इस पावन आयोजन में भारतीय नेपाली ब्राह्मण समिति के कई प्रतिष्ठित सदस्य एवं विद्वान पंडित उपस्थित रहे, जिनमें शामिल हैं:पंडित मधुसूदन ज्ञवाली,पंडित राम प्रसाद गौतम,पंडित थानेश्वर पंथी,दिनेश गौतम,हरिहर गौतम,पदम प्रसाद पंथी,दिपक आचार्यपंडित बसन्त लम्साल,पं अर्जुन पौडेल, पं रामजी पौडेल, पं हरि अधिकारी, पं हेमन्त मणि, पं सुनील उपाध्याय, पं टंक प्रसाद आचार्य, पं टंक प्रसाद पोखरेल, पं पदम प्रसाद ढकाल, पं हरिकृष्ण पौडेल, पं नारायण निरौला, पं कृष्ण मरासीनी, पं माधव प्रसाद मरासीनी, पं वासुदेव पंथी, पं गोविंद प्रसाद पंथी, पं राम प्रसाद पंथी, पं राजन गौतम, पं गोविंद प्रसाद खनाल, पं गोविंद प्रसाद पौडेल, पं लीलाधर गौतम, पं माधव प्रसाद खनाल, पं ईश्वरी खनाल, पं गोपाल ज्ञवाली, पं ओमप्रकाश भट्टराई, पं गोविंद प्रसाद पंथी,एवं अन्य समिति सदस्यगणअतिथियों का स्वागत एवं सम्मान समिति के अध्यक्ष राम प्रसाद मरासीनी ने अतिथियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया और सभी का धन्यवाद किया। उन्होंने इस आयोजन को समाज में धार्मिक एकता एवं आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ाने वाला बताया।
यह तीन दिवसीय यज्ञ 24 मार्च को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा। इसी दिन समिति की वार्षिक स्थापना भी मनाई जाएगी, जो इस आयोजन को और भी विशेष बना देती है।
भारतीय नेपाली ब्राह्मण समिति द्वारा आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम समाज में धर्म, संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण एवं प्रसार के उद्देश्य से किया जाता है। शतचंडी महायज्ञ जैसे अनुष्ठान से विश्व शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समुदाय के लोगों को एक साथ लाने, सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और युवा पीढ़ी को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देने का एक सशक्त माध्यम भी है।

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