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लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों से जनजातीय महोत्सव में छाया उल्लास

By: cradmin

On: Thursday, March 26, 2026 9:52 PM

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देहरादून : राज्य जनजातीय शोध संस्थान (टीआरआई), उत्तराखण्ड, द्वारा आयोजित उत्तराखंड राज्य जनजातीय महोत्सव 2026 का दूसरा दिन राज्य की समृद्ध और विविध जनजातीय संस्कृति को समर्पित एक जीवंत उत्सव के रूप में सामने आया। इस अवसर पर प्रसिद्ध लोक कलाकारों रोहित चौहान, जितेंद्र तोमक्याल, ललित मोहन जोशी, हरीश जोशी और अनुज जौनसारी ने अपनी सुरीली और ऊर्जा से भरपूर प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी रहे।

 

मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा, “मैंने हमेशा प्रयास किया है कि पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी उत्तराखंड जनजातीय महोत्सव में उपस्थित रहूं, और हर बार यह आयोजन मुझे गहराई से प्रेरित करता है। यह महोत्सव हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय पहल है। कृषि मंत्री के रूप में मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि हमारी सरकार जनजातीय समुदायों के कल्याण, सशक्तिकरण और समग्र विकास के लिए निरंतर और प्रभावी कदम उठा रही है।”

 

परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे, जो उत्तराखंड के लोकप्रिय लोक संगीत की धुनों पर झूमते और थिरकते नजर आए।

 

इस अवसर पर टीआरआई के अपर निदेशक योगेंद्र सिंह रावत ने कहा, “उत्तराखंड राज्य जनजातीय महोत्सव हमारी जीवंत परंपराओं का एक सशक्त प्रतिबिंब है। यह न केवल हमारी जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करता है, बल्कि संगीत, कला और साझा अनुभवों के माध्यम से कलाकारों और दर्शकों के बीच सार्थक संबंध भी स्थापित करता है।”

 

सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत प्रसिद्ध लोक गायक रोहित चौहान की प्रस्तुति से हुई, जो उत्तराखंडी संगीत से अपने गहरे जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने ‘घाघरी कु घेरू’, ‘धन सिंह की गाड़ी’ और ‘भोले महादेव’ जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति दी, जिसने पूरे माहौल को ऊर्जा और उत्साह से भर दिया।

 

इसके बाद कुमाऊँनी लोक कलाकार ललित मोहन जोशी और हरीश जोशी ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया। ‘ओ काफुवा’ और ‘फौजी दगड़िया’ जैसे गीतों पर दर्शक भी उनके साथ गुनगुनाते नजर आए।

 

इसके उपरांत मंच पर आए जितेंद्र तोमक्याल, जो पारंपरिक और आधुनिक संगीत के अनूठे संगम के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने ‘धना’ और ‘फिक चहा’ जैसे गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम की रौनक को और बढ़ा दिया।

 

सांस्कृतिक संध्या का समापन अनुज जौनसारी की ऊर्जावान प्रस्तुति के साथ हुआ। उनके लोकप्रिय गीत ‘मंगतु दादा’ और ‘रेशमा’ ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया और कार्यक्रम का भव्य समापन हुआ।

 

तीन दिवसीय उत्तराखंड राज्य जनजातीय महोत्सव, जो कल समाप्त होगा, में बड़ी संख्या में लोग राज्य की सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने और अनुभव करने के लिए पहुंच रहे हैं। महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण प्रदर्शनी-सह-विक्रय केंद्र रहा, जहां जैविक उत्पाद, पारंपरिक हस्तशिल्प जैसे जूट उत्पाद और सजावटी वस्तुएं, तथा उत्तराखंडी व्यंजनों की विविधता देखने को मिली।

 

टीआरआई उत्तराखंड के समन्वयक राजीव कुमार सोलंकी ने कहा, “यह महोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक सशक्त मंच है, जो जनजातीय समुदायों को उनकी कला, शिल्प और परंपराओं को पहचान दिलाने में मदद करता है। सभी आयु वर्ग के लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखना बेहद प्रेरणादायक है।”

 

दिन के समय आयोजित कार्यक्रमों में उत्तराखंड की विभिन्न जनजातियों—भोटिया, बुक्सा, जौनसारी, राजी और थारू—के पारंपरिक नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ अन्य राज्यों के सांस्कृतिक दलों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं, जिससे महोत्सव की विविधता और भी बढ़ गई।

 

इस अवसर पर डायरेक्टर टीआरआई एस एस टोलिया सहित अनेक गणमान्य अतिथि, अधिकारी एवं सांस्कृतिक प्रेमी उपस्थित रहे।

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