देहरादून, । प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने आईटी पार्क सहस्त्रधारा स्थित नाबार्ड कार्यालय में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा आयोजित दो दिवसीय “सेब महोत्सव 2.0” का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जनपदों से आए किसानों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया और उनसे संवाद भी किया।
नाबार्ड ने पिछले वर्ष सेब महोत्सव 1.0 का सफल आयोजन किया था। इस आयोजन का उद्देश्य राज्य के सेब और कीवी उत्पादक किसानों तथा किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को उपभोक्ताओं से सीधे जोड़ने के लिए मंच प्रदान करना है। पिछले वर्ष की सफलता से प्रेरित होकर इस बार कार्यक्रम को और बड़े स्तर पर आयोजित किया गया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि “सेब महोत्सव उत्तराखंड के किसानों की मेहनत, नवाचार और कृषि उद्यमिता का उत्सव है। यह पर्वतीय राज्य की कृषि क्षमता और किसानों की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।” उन्होंने नाबार्ड अधिकारियों से आगामी आयोजनों में कृषि एवं उद्यान विभाग के अन्य उत्पादों को भी शामिल करने के निर्देश दिए।
मंत्री जोशी ने कहा कि नाबार्ड ने उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में कृषि एवं ग्रामीण विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार कृषि के विविधीकरण पर विशेष बल दे रही है। उन्होंने कहा कि बागवानी, औषधीय पौधे, डेयरी, मत्स्य पालन, रेशम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर आकर्षित हों।
उन्होंने बताया कि नाबार्ड द्वारा राज्य में 138 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को अब तक 20 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। इसके अलावा 34 वाटरशेड एवं स्प्रिंगशेड परियोजनाओं के माध्यम से 11,164 हेक्टेयर भूमि का उपचार किया गया, जिससे 5,045 परिवारों को लाभ मिला है। बागवानी आधारित कार्यक्रमों के तहत 4,163 एकड़ भूमि पर सेब, कीवी, अखरोट, आम, अमरूद आदि फलों के बाग विकसित किए गए हैं।
कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि नाबार्ड ने कृषि के विभिन्न आयामों पर आधारित 20 नवाचार पायलट परियोजनाएं शुरू की हैं, जिनमें जैविक उत्पादों की ट्रेसबिलिटी, एक्वापोनिक्स, फार्म टूरिज्म, प्राकृतिक खेती, औषधीय पौधों पर आधारित मॉडल और शून्य ऊर्जा कूल चैंबर जैसी पहलें शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका के अवसर सृजित करना और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि नाबार्ड द्वारा हरिद्वार जिले में 500 किसानों के साथ जैविक खेतों के डिजिटलीकरण की परियोजना भी संचालित की जा रही है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के 27 कृषि उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 6 टैग नाबार्ड के प्रयासों से मिले हैं। वहीं, राज्य सरकार के प्रयासों से दिलवाए गए 18 GI टैग में से 10 नाबार्ड से सहयोग प्राप्त एफपीओ को मिले हैं।
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आर्थिक सशक्तिकरण और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड जैसे संस्थान ग्रामीण विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं। “सेब महोत्सव 2.0 हमारे सामूहिक प्रयासों का प्रतीक है, जिससे उत्तराखंड को एक सतत और समृद्ध कृषि राज्य के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।”
इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी, मुख्य महाप्रबंधक पंकज यादव, जीएम शशि कुमार, डीजीएम संजय कुमार, डीजीएमओ निर्मल कुमार सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
