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जन सामान्य मंच का बड़ा ऐलान : वोट की चोट से ‘स्वार्थ की राजनीति’ खत्म करने का आह्वान

By: cradmin

On: Saturday, April 25, 2026 5:46 PM

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देहरादून,  उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सवर्ण समाज ने अपनी उपेक्षा और वर्तमान नीतियों के विरोध में एकजुट होकर निर्णायक संघर्ष का संकेत दिया है।  उत्तराखंड ब्राह्मण समाज महासंघ (पंजी.) के तत्वावधान में ‘जन सामान्य मंच’ द्वारा उज्जवल रेस्टोरेंट में एक विशाल ‘सवर्ण चिंतन गोष्ठी’ आयोजित की गई।
गोष्ठी में ब्राह्मण संगठनों के पदाधिकारियों के साथ अधिवक्ता, पत्रकार और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने का संकल्प लिया।
वक्ताओं ने वर्तमान राजनीति पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज की नीतियां सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर रही हैं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि ‘कॉमन मैन’ की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जो किसी विशेष श्रेणी या आरक्षण का लाभ नहीं लेता।
मंच के राष्ट्रीय महासचिव एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र कुमार पांडे ने संगठन के उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि यह मंच उन लोगों की आवाज बनेगा, जिनके अधिकार आज की राजनीति में उपेक्षित हैं। उन्होंने सामाजिक समरसता, प्रकृति संरक्षण और आपसी सद्भाव को इस आंदोलन का मूल आधार बताया।
इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित जुगल किशोर तिवारी ने ‘राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा’ के गठन का आह्वान करते हुए कहा कि समाज को पारंपरिक राजनीतिक दलों के विकल्प पर गंभीरता से विचार करना होगा।
गोष्ठी में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर चुनावी हथकंडे अपनाने वाले दलों के सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लिया गया। मंच ने एससी-एसटी एक्ट, वर्तमान आरक्षण व्यवस्था और यूजीसी रेगुलेशन को लेकर भी कड़ा विरोध जताया।
ब्राह्मण महासंघ ने स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों में सवर्ण समाज केवल उन विकल्पों को समर्थन देगा, जो उनके हितों और सामाजिक समानता की बात करेंगे, अन्यथा चुनाव बहिष्कार की रणनीति अपनाई जाएगी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. वी.डी. शर्मा ने किया, जबकि अध्यक्षता पंडित विजेंद्र प्रसाद ममगई ने की।
गोष्ठी में वरिष्ठ समाजसेवी पंडित लालचंद शर्मा, एस.पी. पाठक, विनोद नौटियाल, किसान नेता सुरेंद्र दत्त शर्मा, शशि कुमार शर्मा, मनमोहन शर्मा, अरुण कुमार शर्मा, सिद्धनाथ उपाध्याय, अश्वनी मुद्गल (एडवोकेट), राकेश पंडित (पार्षद) सहित अनेक वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।
इसके अतिरिक्त महंत शशिकांत दूबे, बाल कृष्ण शास्त्री, जीतमणि पैन्यूली, केशव पचौरी सागर, सूर्य प्रकाश भट्ट, अशोक पाण्डेय, दिनेश मिश्रा, रजनीश त्रिवेदी, रजत शर्मा, अवनीशकांत शर्मा, राजकिशोर तिवारी, उमाशंकर शर्मा, घनश्याम चंद्र जोशी, संजय पाठक, सुरेंद्र अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी, पत्रकार और नागरिक उपस्थित रहे।

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