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बेटियों के सपनों को विज्ञान के पंख : “She for STEM” ने दिखाई नई राह

By: Naveen Joshi

On: Sunday, August 31, 2025 6:59 PM

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देहरादून, उत्तराखंड की पहाड़ की बेटियाँ अब सिर्फ सपने ही नहीं देखेंगी, बल्कि उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के पंख भी मिलेंगे। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मालदेवता (रायपुर) के प्रांगण में आज “She for STEM – उत्तराखंड” कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसने छात्राओं को विज्ञान, अभियांत्रिकी और शोध के क्षेत्र में नए आयाम तलाशने की प्रेरणा दी। यह कार्यक्रम विशेष रूप से बीएससी की द्वितीय और तृतीय वर्ष की छात्राओं के लिए तैयार किया गया है, ताकि वे पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी की मुख्यधारा से जुड़ें। कार्यक्रम में शामिल हुई छात्राओं की आँखों में नए सपनों की चमक थी। किसी ने रिसर्च में जाने की इच्छा जताई, तो किसी ने इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाने का संकल्प लिया। UCOST (उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद) से आईं डॉ. रीता सिंह और डॉ. भुवन जोशी ने छात्राओं को यह समझाया कि आत्मनिर्भर भारत का सपना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही साकार हो सकता है।

उन्होंने कहा – “वैज्ञानिक नजरिया सिर्फ प्रयोगशाला तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के हर फैसले को प्रभावित करता है। बेटियों को यह दृष्टि मिलेगी तो समाज भी प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगा।” She for STEM’ कार्यक्रम में छात्राओं को न केवल शोध और उच्च शिक्षा की जानकारी दी गई, बल्कि मोबाइल के जरिए 90 मिनट के विशेष ऑनलाइन सत्र, ऑनलाइन पंजीकरण, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से संवाद, रिसर्च इंटर्नशिप और स्कॉलरशिप के अवसरों की भी जानकारी साझा की गई। यह पहल उन्हें वैश्विक मंच तक पहुँचाने की दिशा में पहला कदम कही जा सकती है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनोद प्रकाश अग्रवाल ने छात्राओं को भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं, जबकि प्रभारी प्राचार्य डॉ. नौटियाल ने उनका मनोबल बढ़ाया। STEM कोऑर्डिनेटर डॉ. ऋतु कश्यप और मेंटर डॉ. एम.पी. तिवारी ने कहा कि यह पहल बेटियों को विज्ञान की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके करियर निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। आज जब तकनीकी और वैज्ञानिक विकास दुनिया की पहचान बन चुका है, ऐसे में उत्तराखंड की बेटियाँ भी इस यात्रा में पीछे न रहें – यही ‘She for STEM’ का उद्देश्य है। यह पहल न सिर्फ शिक्षा का विस्तार है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि पहाड़ की बेटियाँ अवसर मिलने पर किसी से पीछे नहीं हैं।

 

 

 

 

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