देहरादून, राज्य स्थापना की रजत जयंती समारोह के अवसर पर ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में प्रदेश के विश्वविद्यालयों के बीच हस्तशिल्प एवं बहु-व्यंजन कला के आकर्षक मुकाबले आयोजित हुए। दोनों ही प्रतियोगिताओं में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय ने प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी श्रेष्ठता का परचम लहराया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हिमाचल प्रदेश के कुलाधिपति पद्मश्री प्रो. हरमोहिंदर सिंह बेदी ने कहा कि “हमारी संस्कृति केवल हमारी विरासत नहीं, बल्कि हमारी पहचान, आत्मा और प्रेरणा है। आधुनिकता का अर्थ अपनी जड़ों को भूलना नहीं, बल्कि उन्हें और गहराई से समझना है।” उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, कला और परंपरा को सहेजने और आगे बढ़ाने का संकल्प लें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति डा. नरपिंदर सिंह ने की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, पारंपरिक शिल्पकला और पाक कला को नई पीढ़ी के माध्यम से जीवंत बनाए रखना ही इस आयोजन का उद्देश्य है।
हस्तशिल्प एवं बहु-व्यंजन प्रदर्शनी में प्रदेश के लगभग दस विश्वविद्यालयों ने प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने गेरू अल्पना, कुमाऊनी पिछोड़ा, उत्कृष्ट हस्तशिल्प और वुडन क्राफ्ट जैसी पारंपरिक कलाओं की मनमोहक झलक प्रस्तुत की। वहीं बहु व्यंजन प्रदर्शनी में परोसे गए मांडवे की कुकीज, रागी केक, बाजरे और ज्वार की मठरी, मांडवे के मफिन, रागी के लड्डू और गुलाब जामुन ने पारंपरिक स्वाद को आधुनिक अंदाज में पेश किया, जिसने सभी का मन मोह लिया।
हस्तशिल्प प्रदर्शनी में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय ने प्रथम, श्री रामा हिमालयन विश्वविद्यालय ने द्वितीय और कुमाऊँ विश्वविद्यालय ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
बहु व्यंजन प्रदर्शनी में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय प्रथम, गवर्नमेंट बड़कोट डिग्री कॉलेज एवं पतंजलि विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से द्वितीय और अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय तृतीय स्थान पर रहे। विजेताओं को नकद पुरस्कार भी प्रदान किए गए।
इस अवसर पर कुलसचिव डा. नरेश कुमार शर्मा, एसोसिएट डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर एवं एनसीसी ऑफिसर डा. (कैप्टन) डी.सी. पांडे, हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट विभाग के प्रमुख डा. अमर डबराल, शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
