टिहरी/ नैनबाग, मरोड़, सुमनक्यारी बाजार में चलित खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला द्वारा खाद्य पदार्थों की गहन जांच, यात्रियों एवं व्यापारियों को किया गया जागरूक
रिपोर्ट: शिवांश कुंवर, नैनबाग
उत्तराखंड राज्य में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली चार धाम यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार भी है। इसी क्रम में यमुनोत्री धाम की ओर जाने वाले हजारों यात्रियों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, टिहरी गढ़वाल जनपद के खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा एक विशेष अभियान चलाया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य यात्रा मार्ग पर उपलब्ध खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच एवं मिलावट की रोकथाम सुनिश्चित करना था।
दिनांकित अभियान के अंतर्गत नैनबाग, मरोड़ एवं सुमनक्यारी जैसे यात्रा मार्ग के व्यस्त बाजारों में “चलित खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला” (Mobile Food Testing Laboratory) का संचालन किया गया। यह प्रयोगशाला आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित है और यह तत्काल जांच की सुविधा प्रदान करती है।यात्रियों और स्थानीय उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना।
खाद्य कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत जागरूक करना।दूषित एवं मिलावटी खाद्य उत्पादों की बिक्री पर अंकुश लगाना। यात्रा मार्ग की खाद्य श्रृंखला को स्वच्छ, पारदर्शी एवं स्वास्थ्यकर बनाना।इस विशेष अभियान के अंतर्गत लगभग 40 खाद्य कारोबारियों की दुकानों पर जाकर दूध, पनीर, दही जैसे दुग्ध उत्पादों, हल्दी, मिर्च, धनिया जैसे मसालों, मिठाइयों, खाद्य तेल, आटा, चावल, दाल जैसे अनाज तथा अन्य पैक और खुले खाद्य पदार्थों के प्राथमिक नमूने एकत्र किए गए। प्रयोगशाला में मौजूद विशेषज्ञों द्वारा तुरंत रासायनिक व भौतिक परीक्षण किए गए।
दूध में मिलावट की जांच के लिए लैक्टोमीटर टेस्ट और डिटर्जेंट/स्टार्च परीक्षण किया गया। मसालों में कृत्रिम रंगों और भारी धातुओं की उपस्थिति का परीक्षण किया गया।
तेलों में साबुन, खनिज तेल और अन्य अवांछनीय मिलावट की जांच की गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश नमूने संतोषजनक पाए गए, जबकि कुछ स्थानों पर संदिग्ध नमूनों को आगे परीक्षण हेतु स्थायी खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है।
सिर्फ जांच तक ही सीमित न रहकर विभाग ने जागरूकता को भी समान रूप से प्राथमिकता दी। इस दौरान उपस्थित लगभग 40 खाद्य कारोबारियों एवं यात्रियों को साफ-सफाई, खाद्य भंडारण, लेबलिंग, “बेस्ट बिफोर डेट”, एफएसएसएआई लाइसेंस की आवश्यकता एवं मिलावटी खाद्य पदार्थों की पहचान के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। खाद्य सुरक्षा से संबंधित पंपलेट व पोस्टर भी वितरित किए गए। यात्रियों को यह भी बताया गया कि वे किस प्रकार संदिग्ध खाद्य पदार्थ की शिकायत 24×7 टोल फ्री नंबर या खाद्य सुरक्षा पोर्टल के माध्यम से कर सकते हैं। यह पहल यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच भरोसा और जवाबदेही बढ़ाने में सहायक रही।
इस अभियान की सफलता में विभागीय अधिकारियों की सक्रिय भूमिका रही। प्रमुख रूप से: बी.एस. बिष्ट (उपायुक्त, लैब) – कार्यक्रम का नेतृत्व एवं तकनीकी निगरानी।
रमेश जोशी (कनिष्ठ विश्लेषक, खाद्य विभाग) – नमूना परीक्षण व जानकारी प्रदान करना। व्यापार मंडल नैनबाग अध्यक्ष दिनेश सिंह तोमर एवं महामंत्री अनिल सिंह कैंतुरा – व्यापारियों को जागरूक करने एवं विभाग को सहयोग प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।खाद्य सुरक्षा विभाग की यह पहल चार धाम यात्रा को सुचारु एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है। भविष्य में इस प्रकार के अभियान अन्य प्रमुख यात्रा स्थलों जैसे बड़कोट, जानकीचट्टी आदि पर भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे राज्य में “स्वस्थ यात्रा – सुरक्षित उत्तराखंड” के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
इस प्रकार के प्रयासों से एक ओर जहाँ यात्रियों को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध हो रही है, वहीं दूसरी ओर खाद्य कारोबारियों में भी गुणवत्ता सुधार एवं उपभोक्ता उत्तरदायित्व की भावना विकसित हो रही है।





