देहरादून/हरिद्वार। हरिद्वार में वर्ष 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विभिन्न हिंदू संगठनों ने हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता बढ़ा दी है। हाल ही में हर की पैड़ी क्षेत्र में लगाए गए ‘गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित’ पोस्टरों को लेकर उपजे विवाद के बाद अब 25 जनवरी 2026 को हर की पैड़ी पर एक भव्य हिंदू सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
यह सम्मेलन मां गंगा हिंदू सम्मेलन समिति एवं श्री गंगा सभा के तत्त्वावधान में आयोजित होगा। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिंदुत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना, हिंदू समाज को एक मंच पर लाना तथा सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार को गति देना है।
सम्मेलन का विवरण, तारीख व समय: 25 जनवरी 2026, दोपहर 2 बजे, स्थान: हर की पैड़ी, संजय पुल के समीप मां गंगा की पावन धरा, उद्देश्य: हिंदुत्व जागरण, सामाजिक एकजुटता और सनातन मूल्यों का प्रसार
सम्मेलन से पूर्व विभिन्न क्षेत्रों से एक भव्य यात्रा निकाले जाने की भी योजना है, जो कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेगी। आयोजकों का कहना है कि यह यात्रा हिंदू समाज की एकता का प्रतीक होगी।
प्रमुख वक्ता व अतिथि, मुख्य वक्ता: महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद, विशेष संत: महामंडलेश्वर मैत्री गिरि महाराज, मुख्य अतिथि: आरएसएस प्रांत प्रचारक शैलेंद्र, संरक्षक: श्री गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम, संयोजक: उज्ज्वल पंडित
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि यह सम्मेलन हिंदुत्व जागरण और हिंदू समाज की एकता को मजबूती देगा। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया
16–17 जनवरी 2026 को हर की पैड़ी के घाटों पर ‘गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित’ और ‘अहिंदू प्रवेश निषेध क्षेत्र’ जैसे पोस्टर लगाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया था। गंगा सभा ने 1916 के ब्रिटिशकालीन नियमों का हवाला देते हुए पवित्र स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की बात कही। वहीं, विपक्षी दलों ने इसे संविधान के विरुद्ध बताया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मुद्दे पर पवित्रता की रक्षा का पक्ष रखा।
अर्धकुंभ 2027 की तैयारियां
वर्ष 2027 के अर्धकुंभ के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अनुमानित 700 करोड़ रुपये की लागत से स्थायी और अस्थायी निर्माण, यातायात तथा भीड़ प्रबंधन की योजनाएं बनाई जा रही हैं। प्रस्तावित हिंदू सम्मेलन को अर्धकुंभ की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वह इस आयोजन से औपचारिक रूप से जुड़ा नहीं है। हालांकि, हर की पैड़ी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में होने वाले इस सम्मेलन को लेकर राजनीतिक और धार्मिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसका आगामी अर्धकुंभ की तैयारियों और सामाजिक माहौल पर क्या प्रभाव पड़ता है।
