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आज से होलाष्टक आरंभ, 3 मार्च तक मांगलिक कार्यों पर रहेगा विराम

By: Naveen Joshi

On: Tuesday, February 24, 2026 8:08 AM

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देहरादून ,रंगों का पावन पर्व होली इस वर्ष 4 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। उससे आठ दिन पूर्व आज  से होलाष्टक प्रारंभ हो जाएगा, जो 3 मार्च को होलिका दहन तक प्रभावी रहेगा। पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि आज  प्रातः 7 बजकर 14 मिनट तक रहेगी, इसके पश्चात अष्टमी लगते ही होलाष्टक आरंभ हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों पर विराम रखा जाता है।

क्या है होलाष्टक?

हिंदू पंचांग के अनुसार होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से प्रारंभ होकर पूर्णिमा, अर्थात होलिका दहन तक चलता है। होली से आठ दिन पूर्व आरंभ होने के कारण इसे ‘होलाष्टक’ कहा जाता है। इन दिनों को विशेष रूप से संयम, साधना और भक्ति का काल माना गया है।

क्यों वर्जित माने जाते हैं शुभ कार्य?

पौराणिक मान्यता के अनुसार भक्त प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के लिए अनेक यातनाएं दीं। अंततः हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर प्रह्लाद को अग्नि में बैठाने की योजना बनाई। किंतु विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका दहन हो गई। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है।

मान्यता है कि इन आठ दिनों में ग्रहों की स्थिति उग्र रहती है, जिससे विवाह, सगाई या अन्य मांगलिक कार्यों का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। एक अन्य कथा के अनुसार इसी काल में शिव की तपस्या भंग करने का प्रयास हुआ था, इसलिए इसे तप और संयम का समय भी माना जाता है।

इन कार्यों से रखें परहेज

परंपरा के अनुसार होलाष्टक के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, भवन निर्माण, मुंडन, नामकरण, कर्णछेदन, यज्ञोपवीत संस्कार, नया व्यापार या नौकरी प्रारंभ करना, भूमि-वाहन-आभूषण की खरीदारी तथा बड़े हवन-यज्ञ जैसे मांगलिक कार्य टालने की सलाह दी जाती है। इन नियमों का उद्देश्य संभावित बाधाओं से बचाव और शुभ फल की प्राप्ति माना गया है।

वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण

विशेषज्ञों का मानना है कि होली से पूर्व का समय ऋतु परिवर्तन का होता है। सर्दी से गर्मी की ओर बढ़ते इस संक्रमण काल में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में बड़े सामाजिक आयोजनों को टालना व्यावहारिक दृष्टि से भी उचित समझा गया है। संभवतः इसी कारण इस अवधि को संयम और सावधानी का काल माना गया।

क्या करें इस अवधि में?

होलाष्टक को आत्मचिंतन, भक्ति और साधना का समय माना गया है। इस दौरान भगवान का स्मरण, जप-तप, दान-पुण्य, जरूरतमंदों की सहायता, घर की साफ-सफाई तथा पुराने मनमुटाव समाप्त करने जैसे कार्य शुभ माने जाते हैं।

आज  से 3 मार्च तक चलने वाले इन आठ दिनों में श्रद्धा और शांति के साथ समय व्यतीत करने के पश्चात 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगोत्सव के साथ उल्लासपूर्ण वातावरण की शुरुआत होगी।

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