देहरादून,डॉ सलिल गर्ग द्वारा सफलतापूर्वक मरीज को एवीईआईआर लीडलेस पेसमेकर लगाया जो अपनी तरह का पहला डुअल चैंबर लीडलेस पेसिंग सिस्टम है जो कि उत्तराखंड में पहली बार डॉ सलिल गर्ग द्वारा लगाया गया है।
इस नवीनतम वा अत्याधुनिक लीडलेस पेसमेकर की खास बात यह है कि यह एक कैप्सूल के बराबर का पेसमेकर है जो बिना सर्जरी के हृदय में लगाया जाता है तथा 20 वर्ष तक यह पेसमेकर कार्य करने में सक्षम है तथा यह दुबारा निकाला भी जा सकता है।
इससे पहले जो माइक्रा पेसमेकर था वह केवल 8 से 10 वर्ष तक ही कार्य करता था तथा एक बार डालने के बाद वह दुबारा नहीं निकाला जा सकता।
परन्तु अब यह नवीन तकनीक में 20 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद दुबारा इसे निकाला जा सकता है। वा उसकी जगह दूसरा पेसमेकर लगाया जा सकता है।
डॉ. सलिल गर्ग ही एकमात्र ऐसे इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट जिनके द्वारा सबसे ज्यादा माइक्रो पेसमेकर लगाए गए है।
इससे पहले करीबन 20 से अधिक माइक्रा पेसमेकर डॉक्टर गर्ग द्वारा अलग अलग जगह जैसे आर्मी हॉस्पिटल आर आर दिल्ली, फोर्टीस चंडीगढ़, लुधियाना, जम्मू हस्पताल इत्यादि जगह में प्रॉक्टर के रूप किए जा चुके है।
उत्तराखंड का पहला माइक्रो पेसमेकर श्री महंत इंदिरेश हस्पताल में डा. गर्ग द्वारा ही किया गया था।
तथा
इस बार भी उत्तराखंड का पहला अत्याधुनिक वा नवीनतम एवीईआईआर लीडलेस पेसमेकर भी डा. सलिल गर्ग द्वारा ही किया गया था।
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