देहरादून, बद्री फल (सीबकथोर्न) के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेषज्ञों ने व्यापक स्तर पर इसकी मार्केटिंग करने का सुझाव दिया।
ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में बद्रीफल पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में उत्तराखंड सहित हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा व उड़ीसा के वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं ने भाग लिया। सम्मेलन में बद्रीफल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेषज्ञों ने मार्केटिंग के साथ बेहतर नीतियां बनाने, सीमांत क्षेत्रों में इसकी खेती करने, किसानों को जागरूक करने, खाद्य पदार्थों व दवाई में इसका उपयोग करने, इसकी कटाई के लिए मशीन बनाने व प्रीसीजन फार्मिंग का उपयोग करने जैसे सुझाव दिए।
दो दिवसीय सम्मेलन में इस विषय से सम्बन्धित 20 शोध पत्र व 24 पोस्टर प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन के आखिरी दिन आज शोध पत्र प्रतियोगिता में गढ़वाल यूनिवर्सिटी की डा. विजय लक्ष्मी त्रिवेदी ने बाजी मारी। पोस्टर प्रतियोगिता की पारिस्थितिक वितरण एवं आनुवंशिकी विविधता की श्रेणी में ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के अंशुमन रावत व मनमोहन पटेल ने प्रथम स्थान हासिल किया। पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन से मुकाबले की श्रेणी में गढ़वाल यूनिवर्सिटी की जया बिष्ट ने पहला स्थान प्राप्त किया। दवा व औषधीय महत्व की श्रेणी में जियोंन लाइफ साइंसेज, नोएडा की शालू चैहान अव्वल रही। बद्रीफल के सामाजिक आर्थिक विकास की श्रेणी में गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान, लद्दाख की स्टेनजिन डोलमा ने पहला स्थान हासिल किया।
राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन ग्राफिक एरा के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने सीबकथोर्न एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सहयोग से किया।
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