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मेदांता ने उच्च-सफलता चिकित्सा देखभाल के साथ भारत के लंग ट्रांसप्लांट और थोरैसिक सर्जरी परिदृश्य में प्रगति का प्रदर्शन किया

By: Naveen Joshi

On: Saturday, June 20, 2026 5:40 PM

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अमृतसर: जैसे-जैसे फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का बोझ बढ़ रहा है, लंग ट्रांसप्लांट (फेफड़ा प्रत्यारोपण) उन मरीजों के लिए जीवन रक्षक विकल्प के रूप में उभर रहा है जो सांस की गंभीर स्थितियों से पीड़ित हैं और उपचार के अन्य सभी विकल्प आजमा चुके हैं। कभी इसे एक अत्यधिक विशिष्ट प्रक्रिया माना जाता था जो वैश्विक स्तर पर केवल चुनिंदा केंद्रों में ही उपलब्ध थी, लेकिन गुरुग्राम स्थित मेदांता- द मेडिसिटी ने हमारे देश में लंग ट्रांसप्लांट को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। मेदांता को न्यूजवीक द्वारा 2026 में भारत का सर्वश्रेष्ठ अस्पताल चुना गया है।

 

इस अस्पताल ने उत्तर भारत में पहला लंग ट्रांसप्लांट कार्यक्रम स्थापित किया था और आज यह 90% से अधिक की सफलता दर दर्ज करता है। एक बेहद अनुभवी बहुविषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) टीम के माध्यम से यह एंड-स्टेज लंग डिजीज जैसे कि अत्यधिक गंभीर इंटरस्टिशियल लंग डिजीज, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, सिस्टिक फाइब्रोसिस या पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन से पीड़ित मरीजों को व्यापक देखभाल प्रदान करता है।

 

मेदांता गुरुग्राम में रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन विभाग के डिरेक्टर डॉ. विवेक सिंह ने कहा, “लंग ट्रांसप्लांट पर तब विचार किया जाना चाहिए जब फेफड़ों की कार्यक्षमता उस स्तर तक गिर जाए जहाँ जीवन की गुणवत्ता से गंभीर समझौता हो और हस्तक्षेप के बिना जीवन प्रत्याशा सीमित हो। समय पर रेफरल, सावधानीपूर्वक मरीज के चयन और ट्रांसप्लांट के बाद की व्यापक देखभाल के साथ, लंग ट्रांसप्लांट गतिशीलता व स्वतंत्रता को बहाल कर सकता है और जीवित रहने की दर में काफी सुधार कर सकता है। मेदांता में, हमने वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ केंद्रों के समान परिणाम देने के लिए ट्रांसप्लांट सर्जनों, पल्मोनोलॉजिस्ट, इंटेंसिविस्ट और पुनर्वास विशेषज्ञों को मिलाकर एक एकीकृत इकोसिस्टम बनाया है।”

वह क्रिटिकल केयर सोसाइटी, अमृतसर के सहयोग से मेदांता द्वारा अमृतसर में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। सभी बड़े ट्रांसप्लांट की तरह, लंग ट्रांसप्लांट में भी कुछ जोखिम शामिल होते हैं, जिनमें ऑर्गन रिजेक्शन (अंग की अस्वीकृति), लंबे समय तक चलने वाले इम्यूनोसप्रेसेरिव थेरेपी के कारण संक्रमण, रक्त के थक्के जमना और ऑपरेशन के बाद की अन्य जटिलताएं शामिल हैं। डॉ. सिंह ने कहा, “हालांकि, पिछले दशक में सर्जिकल तकनीकों, क्रिटिकल केयर और ट्रांसप्लांट के बाद की निगरानी में हुई प्रगति से परिणामों में लगातार सुधार हुआ है।”

 

मेदांता गुरुग्राम के इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट सर्जरी, चेस्ट ऑन्को-सर्जरी एंड लंग ट्रांसप्लांट के वरिष्ठ कंसलटेंट डॉ. हर्ष वर्धन पुरी ने फेफड़े, अन्नप्रणाली (ईसोफेगस) और मीडियास्टिनल रोगों के लिए उन्नत सर्जिकल हस्तक्षेपों पर प्रकाश डाला। इनमें वीडियो-असिस्टेड थोरैसिक सर्जरी जैसी उन्नत तकनीकें शामिल हैं – जो एक मिनिमली इनवेसिव तकनीक है जिसमें जटिल छाती प्रक्रियाओं को करने के लिए छोटे चीरों और विशेष कैमरों का उपयोग किया जाता है – साथ ही रोबोटिक-असिस्टेड थोरैसिक सर्जरी भी शामिल है, जो बेहतर सटीकता व दक्षता के साथ हाई-डेफिनिशन 3D विज़ुअलाइज़ेशन को जोड़ती है।

 

मेदांता इन दोनों तकनीकों में अग्रणी है, जिसके परिणामस्वरूप मरीज को कम दर्द होता है, जटिलताओं की दर कम होती है और रिकवरी तेजी से होती है। डॉ. पुरी ने कहा, “आज थोरैसिक सर्जरी में सबसे बड़ा बदलाव जटिल छाती रोगों का शुरुआती चरण में निदान और इलाज करने की क्षमता है, जिससे मरीजों के जीवन में बहुत कम व्यवधान आता है। चाहे वह फेफड़ों का कैंसर हो, उन्नत एम्पायमा हो, वायुमार्ग के विकार हों, चेस्ट वॉल ट्यूमर हों या मीडियास्टिनल रोग हों, आधुनिक सर्जिकल दृष्टिकोणों ने नैदानिक परिणामों में सुधार करते हुए रिकवरी के समय को नाटकीय रूप से कम कर दिया है। मेदांता में, हमारा बहुविषयक दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक मरीज को व्यक्तिगत उपचार योजना, उन्नत सर्जिकल तकनीक तक पहुंच और व्यापक पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल का लाभ मिले।”

 

अपने अग्रणी लंग ट्रांसप्लांट कार्यक्रम, उन्नत मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल क्षमताओं और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता के साथ, मेदांता थोरैसिक और ट्रांसप्लांट केयर में नए मानदंड स्थापित करना जारी रखे हुए है, जिससे मरीजों को आसानी से सांस लेने और बेहतर जीवन जीने में मदद मिल रही है।

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