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प्राकृतिक संसाधन सतत् विकास की कुंजी… 

By: Naveen Joshi

On: Wednesday, November 12, 2025 11:04 PM

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देहरादून,  ग्राफिक एरा में देश भर के विशेषज्ञों ने औषधि और सुगंधित पौधों के क्षेत्र में नई संभावनाओं और चुनौतियों पर मंथन किया।

 

इस विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए सोसाइटी फॉर प्लांट रिसर्च के जनरल मैनेजर डा. एस. के. भटनागर ने कहा कि जहां कई एलोपैथिक दवाएं दुष्प्रभाव के कारण प्रतिबंधित हो चुकी है वही पौधों पर आधारित पारंपरिक भारतीय चिकित्सा आज भी सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती है।

 

यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. नरपिंदर सिंह ने कहा कि अगर हम जिम्मेदारी से खेती करें, औषधीय पौधों के उपयोगी गुना का वैज्ञानिक तरीके से लाभ उठाएं और दुनिया की अच्छी पद्धतियां अपनाए तो भारत आर्थिक रूप से मजबूत होकर अग्रणी बन सकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वह अपने आसपास उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों को समझें और उनका उपयोग देश के सतत् विकास और आर्थिक उन्नति में करें।

 

इस राष्ट्रीय सम्मेलन में 16 राज्यों के 52 शैक्षणिक संस्थाओं के विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन में आठ तकनीकी सत्रों में 150 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें पौध ऊतक संवर्धन, संरक्षण रणनीतियां और सुगंधित पौधों में जैव प्रौद्योगिकी नवाचार जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया।

 

इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्मेंट ने किया। सम्मेलन में कुलसचिव डा. नरेश कुमार शर्मा, डिपार्टमेंट हेड डा. रूपक नागरिक, डा. जानवी मिश्रा रावत समेत अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन डा. जिगिशा आनंद ने किया।

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