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प्रकृति और संस्कृति एक-दूसरे में रची-बसी…

 

 

देहरादून ,  इतिहासकार और लेखक डा. लोकेश ओहरी ने कहा कि उत्तराखंड में प्रकृति और संस्कृति एक-दूसरे में रची-बसी हैं। यहाँ पर्वत, नदियाँ और वन मात्र भौगोलिक संरचनाएँ नहीं, बल्कि लोगों की जीवनशैली, परंपराओं और सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न और जीवंत अंग हैं।

 

वह आज ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में छात्र छात्राओं को संबोधित कर रहे थे। डा. लोकेश ने कहा कि विरासत केवल स्मारकों या अतीत की वस्तुओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह लोगों की जीवनशैली, भाषा, लोककथाओं, रीति-रिवाज़ों और स्थानों से जुड़ी निरंतर चलती परंपराओं में जीवित रहती है। अपनी प्रेजेंटेशन के माध्यम से उन्होंने उत्तराखंड की लोक-संस्कृति, परंपराओं, स्मृतियों और भौगोलिक स्थानों के बीच के गहरे संबंधों को रेखांकित किया।

 

इस सत्र का आयोजन ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ इंग्लिश ने किया। सत्र में डिपार्टमेंट की हेड डा. रूपिंदर कौर, डा. लक्ष्मी चौहान , डा.विपिन कुमार, हिमांशु नेगी के साथ अन्य शिक्षक शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

 

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