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एनएसयूआई का डीएम कार्यालय घेराव, एंजल चकमा हत्याकांड व अंकिता भंडारी मामले में सीबीआई जांच की मांग

By: Naveen Joshi

On: Sunday, January 4, 2026 8:26 AM

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देहरादून, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के कार्यकर्ताओं ने आज देहरादून नगर निगम से पैदल मार्च करते हुए जिला अधिकारी कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर छात्र हितों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की गई।

इस अवसर पर एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष विकास नेगी ने कहा कि प्रदेश में घटित एंजल चकमा हत्याकांड ने छात्र समाज को गहरे आघात में डाल दिया है। यह घटना न केवल प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करती है। उन्होंने कहा कि अब तक दोषियों पर कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई न होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।

विकास नेगी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि इस जघन्य घटना ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया था। आम जनमानस और छात्र समुदाय में यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि अब तक की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं रही है। प्रकरण की संवेदनशीलता और प्रभावशाली व्यक्तियों की संलिप्तता की आशंकाओं को देखते हुए इस मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से पुनः जांच कराए जाने की आवश्यकता है, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और समाज का विश्वास बहाल हो।

एनएसयूआई ने प्रदेश में संचालित कई निजी विश्वविद्यालयों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा को सेवा के बजाय व्यापार बनाया जा रहा है। संगठन के अनुसार निजी विश्वविद्यालयों में छात्रों से मनमाने ढंग से अत्यधिक फीस वसूली, पैसे लेकर 75 प्रतिशत उपस्थिति पूरी दिखाना, फेल छात्रों को बैक पेपर या विशेष परीक्षा के नाम पर भारी शुल्क लेकर पास करना, शैक्षणिक नियमों का खुलेआम उल्लंघन तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव जैसी अनियमितताएं सामने आ रही हैं।

एनएसयूआई की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

एंजल चकमा हत्याकांड की निष्पक्ष, समयबद्ध एवं उच्चस्तरीय जांच कराते हुए दोषियों को अविलंब कठोरतम दंड दिया जाए।

अंकिता भंडारी हत्याकांड की CBI से निष्पक्ष जांच कराई जाए।

प्रदेश में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु ठोस और प्रभावी सुरक्षा तंत्र लागू किया जाए।

सभी निजी विश्वविद्यालयों की फीस संरचना, उपस्थिति प्रणाली, परीक्षा व्यवस्था एवं प्रशासनिक नियमों की स्वतंत्र एवं विस्तृत जांच कराई जाए।

अवैध रूप से फीस वसूली, उपस्थिति पूरी करने और बैक पेपर के नाम पर धन वसूली करने वाले निजी विश्वविद्यालयों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

शिक्षा के बाजारीकरण पर रोक लगाने के लिए कड़े नियामक दिशा-निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू किए जाएं।

इस दौरान पूर्व विधायक राजकुमार, राष्ट्रीय संचार सचिव वैभव वालिया, प्रदेश प्रवक्ता अभिनव थापर, पूर्व जिला अध्यक्ष युवा कांग्रेस कमल कांत, प्रदेश उपाध्यक्ष आयुष सेमवाल, हिमांशु चौधरी, एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष अभय कैतुरा, प्रदीप तोमर, प्रियांश छाबरा, सागर सेमवाल, अमित जोशी, हन्नी कुमार, पुनीत राज सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित

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