देहरादून,मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सिंचाई और लघु सिंचाई विभाग की विभिन्न योजनाओं की गहन समीक्षा की। सचिव श्री आर. राजेश कुमार ने विभागीय योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
परियोजनाएं समय-सीमा में पूर्ण हों: मुख्य सचिव ने बड़ी परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए और कार्यों की प्राथमिकता तय करने पर बल दिया।
तकनीकी उपाय और सामुदायिक भागीदारी: सिंचित-असिंचित क्षेत्रों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग और ग्राम पंचायत समितियों के माध्यम से नहर व लिफ्ट योजनाओं के संचालन की बात कही गई।
सौर ऊर्जा पर ज़ोर: नलकूप व लिफ्ट नहर योजनाओं में सौर ऊर्जा संयंत्रों को अपनाने और विभाग की खाली ज़मीन पर 1 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया।
ड्रिप और स्प्रिंकल सिंचाई पर फोकस: लघु सिंचाई विभाग को ड्रिप और स्प्रिंकल विधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए, विशेषकर पानी की कमी वाले क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों में।
प्रमुख परियोजनाओं की निगरानी: जमरानी, सौंग और बलियानाला जैसी परियोजनाओं की नियमित अनुश्रवण (सचिव स्तर पर मासिक, विभागाध्यक्ष स्तर पर साप्ताहिक/पाक्षिक) की व्यवस्था की जाएगी।
जमरानी बांध परियोजना: कार्य प्रारंभ – जून 2024; पूर्णता – मार्च 2030; लागत – ₹3808.16 करोड़
सौंग बांध पेयजल परियोजना: कार्य प्रारंभ – नवम्बर 2024; पूर्णता – दिसम्बर 2029; लागत – ₹2491.96 करोड़
जलधाराओं का पुनर्जीवन: आई.आर.आई. रुड़की को वर्षा आधारित नदियों और जलधाराओं के पुनर्जीवन कार्यों का प्रभाव आकलन करने हेतु नामित किया गया।
उपस्थित अधिकारी: सचिव आर. राजेश कुमार, सिंचाई विभाग के जयपाल सिंह, लघु सिंचाई विभाग के बृजेश कुमार तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी।
