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आपदा तैयारियों की समीक्षा, विभागों को जमीनी स्तर पर तैयारी के निर्देश

By: Naveen Joshi

On: Monday, June 1, 2026 7:07 PM

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आपदा प्रबंधन में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, जमीनी तैयारी सुनिश्चित करें विभाग

देहरादून, । आगामी मानसून सत्र को देखते हुए जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन, राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को लेकर व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे सात दिनों के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों का विस्तृत माइक्रो प्लान तैयार कर प्रस्तुत करें तथा आपदा प्रबंधन को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर प्रभावी तैयारी सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं सभी नगर निकायों को अपने क्षेत्रों में नदी-नालों, नालियों और जल निकासी तंत्र की युद्धस्तर पर सफाई कर सात दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही जलभराव की संभावनाओं वाले क्षेत्रों में टास्क फोर्स एवं कंट्रोल रूम स्थापित करने तथा सफाई कार्यों की दैनिक प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा।

उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों को संभावित रूप से संपर्क-विहीन होने वाले गांवों की सूची तैयार करने, जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हीकरण करने तथा त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) गठित करने के निर्देश दिए। नदी किनारे बसे गांवों की सुरक्षा के लिए अलग कार्ययोजना तैयार करने और तहसील स्तर पर उपलब्ध आपदा राहत संसाधनों का सत्यापन करने को भी कहा गया।

लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई, राष्ट्रीय राजमार्ग और एनएचएआई को सभी भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का पुनः सत्यापन करने, आवश्यक मशीनरी एवं मानव संसाधन पूर्व से तैनात रखने तथा वैकल्पिक मार्गों का चिन्हीकरण करने के निर्देश दिए गए। डीएम ने कहा कि मानसून के दौरान मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

स्वास्थ्य विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती एवं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं का चिन्हीकरण कर सुरक्षित प्रसव की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही डेंगू, मलेरिया एवं अन्य जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए सात दिनों के भीतर विस्तृत माइक्रो प्लान प्रस्तुत करने को कहा गया।

मुख्य शिक्षा अधिकारी को ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए जहां विद्यार्थियों और शिक्षकों को नदी-नालों या भूस्खलन प्रभावित मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है। आवश्यकता पड़ने पर गांव स्तर पर वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।

विद्युत विभाग को जर्जर पोलों, झूलती विद्युत लाइनों और जोखिमपूर्ण ढांचों की मरम्मत शीघ्र पूर्ण करने तथा ट्रांसफार्मरों एवं लाइनों के आसपास स्थित पेड़ों की लॉपिंग और कटान कर सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जल संस्थान एवं पेयजल निगम को भी मानसून के दौरान निर्बाध पेयजल आपूर्ति बनाए रखने तथा क्षतिग्रस्त लाइनों के त्वरित पुनर्स्थापन की कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।

बैठक में पुलों के सेफ्टी ऑडिट, नदियों एवं गदेरों में आवश्यक ड्रेजिंग, जलभराव वाले क्षेत्रों की समस्या, मसूरी के लंढौर बाजार में भू-धंसाव, खाद्य सामग्री एवं ईंधन की उपलब्धता, पशु चारा बैंक तथा सेना एवं अर्द्धसैनिक बलों के साथ समन्वय जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि आगामी मानसून को देखते हुए सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हुए आपदा पूर्व तैयारी, त्वरित राहत एवं प्रभावी बचाव व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसून अवधि में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी विभाग निर्धारित समयसीमा के भीतर अपनी तैयारियां पूर्ण करें।

बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी राहुल आनंद, नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि कुछ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

 

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