नई दिल्ली। देश में बढ़ते मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को निर्देश दिया है कि सभी पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर ‘फ्रंट-ऑफ-पैक’ (Front-of-Pack) स्पष्ट चेतावनी और पोषण संबंधी जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए। अदालत ने कहा है कि जिन उत्पादों में चीनी, वसा और नमक (सोडियम) की मात्रा अधिक है, उनकी जानकारी पैकेट के सामने बड़े और स्पष्ट अक्षरों में अंकित हो, ताकि उपभोक्ता खरीदते समय जागरूक निर्णय ले सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि खाद्य कंपनियों के व्यावसायिक हित उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से ऊपर नहीं हो सकते। न्यायालय ने FSSAI को आवश्यक नियमों में संशोधन कर शीघ्र प्रभाव से व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि नियामक स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई, तो अदालत हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल दीक्षित ने निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान में पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में दी गई पोषण संबंधी जानकारी आम उपभोक्ता के लिए पर्याप्त नहीं होती। उनके अनुसार, “फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग से उपभोक्ताओं को तुरंत पता चल सकेगा कि उत्पाद में चीनी, नमक या वसा की मात्रा कितनी अधिक है। इससे मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी समस्याओं की रोकथाम में मदद मिलेगी।”
गौरतलब है कि देश में जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड के बढ़ते सेवन को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट चेतावनी लेबलिंग से न केवल उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि कंपनियों पर भी अपने उत्पादों में हानिकारक तत्वों की मात्रा कम करने का दबाव बनेगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश सार्वजनिक स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे खाद्य उत्पादों में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित विकल्प चुनने का अवसर मिलेगा।
