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आस्था संग पर्यावरण संरक्षण का संदेश, अर्धकुंभ में लौटेगी कुल्हड़ और मिट्टी के बर्तनों की परंपरा

By: Naveen Joshi

On: Friday, May 29, 2026 10:14 PM

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देहरादून/हरिद्वार। वर्ष 2027 में हरिद्वार की पावन धरती पर आयोजित होने जा रहे अर्धकुंभ को स्वच्छ, पर्यावरण अनुकूल और सनातन परंपराओं के अनुरूप बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के इस महापर्व में प्लास्टिक और पॉलीथीन मुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए मिट्टी के पारंपरिक बर्तनों को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है।

सरकारी आकलन के अनुसार अर्धकुंभ में लगभग 15 से 20 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। ऐसे विशाल आयोजन में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए “मिट्टी से सँवरना, मिट्टी हो जाना” की भावना के साथ मिट्टी के कुल्हड़, प्लेट और पारंपरिक बर्तनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस पहल से एक ओर जहां अर्धकुंभ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गरिमा और अधिक दिव्य दिखाई देगी, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कुम्हार समाज को भी रोजगार और सम्मान का नया अवसर मिलेगा। कुम्हारों के चाक को नई रफ्तार देने के लिए प्रदेश सरकार के लघु उद्योग विभाग द्वारा देहरादून और हरिद्वार क्षेत्र के कुम्हारों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा और मिट्टी उठान की सरकारी अनुमति भी प्रदान की जाएगी।

इस क्रम में कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी ने देहरादून की संकरी गलियों में बसे कुम्हार परिवारों तक पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। वर्षों से संघर्ष कर रहे कारीगरों के चेहरों पर इस पहल से नई उम्मीद और आत्मविश्वास दिखाई दिया।

सरकार की इस पहल को केवल एक योजना नहीं, बल्कि श्रम, परंपरा और मिट्टी की सौंधी खुशबू के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। कुम्हार समाज का कहना है कि यह सहायता केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि उनकी कला, मेहनत और अस्तित्व को मिला सम्मान है।

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