आंदोलन के शहीदों के परिजनों, पत्रकारों और छायाकारों का सम्मान, “शहीदों को नमन” कैलेंडर का विमोचन
देहरादून: उत्तराखंड राज्य आंदोलन की रजत जयंती के अवसर पर देहरादून स्थित कचहरी परिसर के शहीद स्मारक में “शहीदों को नमन” श्रद्धांजलि एवं गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत हवन, वंदे मातरम् गीत और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।
शहीदों को नमन समिति और श्री दुर्गा सोशल वेलफेयर सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य आंदोलन के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने आंदोलन में पत्रकारों और छायाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका को याद करते हुए उनके योगदान को सराहा।
कार्यक्रम में दायित्वधारी अशोक वर्मा ने कहा कि राज्य आंदोलन में पत्रकारों और छायाकारों की भूमिका बेहद अहम रही है। पूर्व सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने कहा कि आंदोलन की सफलता का श्रेय पत्रकारों और आंदोलनकारियों को जाता है और इसे शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल ने आंदोलनकारियों के मुद्दों को सरकार के समक्ष गंभीरता से रखने का आश्वासन दिया। वरिष्ठ आंदोलनकारी जगमोहन नेगी और वरिष्ठ पत्रकारों ने भी सरकार द्वारा पत्रकारों के योगदान की अनदेखी पर चिंता व्यक्त की और पारदर्शी सम्मान की मांग उठाई।
इस अवसर पर राज्य आंदोलन के शहीदों के परिजनों सहित अनेक वरिष्ठ पत्रकारों, छायाकारों और आंदोलनकारियों को शॉल और पुष्प भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही “शहीदों को नमन” कैलेंडर का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध गायक अलेक्जेंडर ने “चिट्ठी न कोई संदेश…” गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भावुक बना दिया, जिससे उपस्थित जनों की आंखें नम हो गईं।
कार्यक्रम का संचालन जगमोहन नेगी और मंगेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान कई गणमान्य व्यक्तियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही।





