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उत्तराखंड की सांसद निधि का उपयोग अन्य राज्यों में, आरटीआई में हुआ खुलासा

 

देहरादून। उत्तराखंड के कई ग्रामीण क्षेत्र आज भी पेयजल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं राज्य के सांसद अपनी सांसद निधि (एमपीएलएडी) का बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों में खर्च कर रहे हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी में इसका खुलासा हुआ है।

आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार उत्तराखंड के सांसदों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में ट्यूबवेल स्थापना, स्कूल व सामुदायिक भवन निर्माण, जल निकासी और फुटपाथ निर्माण जैसे कार्यों के लिए करीब एक करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। दूसरे राज्यों पर सबसे अधिक दरियादिली दिखाने में टिहरी गढ़वाल की सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह सबसे आगे रही हैं।

आगरा पर खास मेहरबानी

टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने उत्तर प्रदेश के आगरा जिले पर विशेष ध्यान दिया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्होंने आगरा के लिए कुल एक करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की। इसमें फुटपाथ, पैदल मार्ग और पेयजल से जुड़े कार्य शामिल हैं।

वहीं, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने हरियाणा राज्य में स्कूल, कॉलेज और सामुदायिक भवनों के निर्माण के लिए 25 लाख रुपये की सांसद निधि आवंटित की।

अल्मोड़ा सांसद ने नैनीताल में दिखाई दरियादिली

अल्मोड़ा से लोकसभा सांसद अजय टम्टा ने अपने संसदीय क्षेत्र से बाहर नैनीताल जिले में विकास कार्यों के लिए निधि स्वीकृत की है। उन्होंने 27 जून 2025 को नैनीताल के स्कूल और कॉलेजों में कक्षों व हॉल निर्माण हेतु पांच लाख रुपये की राशि मंजूर की।

नियमों में बदलाव से मिली छूट

दूसरे राज्यों में सांसद निधि खर्च करने की यह छूट नियमों में हुए बदलाव के बाद संभव हुई है। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के 13 अगस्त 2024 के पत्र के अनुसार, एमपीएलएडी फंड के उपयोग में संशोधन किया गया है। अब कोई भी सांसद देश के किसी भी हिस्से में विकास कार्यों की सिफारिश कर सकता है। हालांकि, एक वित्तीय वर्ष में इसकी अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तय की गई है।

सांसदों का पक्ष

टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह का कहना है कि उत्तराखंड के लोग देशभर में निवास करते हैं। कुछ जरूरतमंद लोग उनके पास पहुंचे थे, जिनकी मांग पर कार्यों को स्वीकृति दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि टिहरी का विकास उनकी प्राथमिकता है और सांसद निधि का अधिकांश हिस्सा उत्तराखंड में ही खर्च किया जाता है।

पुराने कार्यकाल का मामला भी आया सामने

आरटीआई में यह भी सामने आया है कि राज्यसभा सांसद तरुण विजय के कार्यकाल (2010-16) के दौरान स्वीकृत धनराशि को 10 दिसंबर 2025 को आवंटित किया गया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जल निकासी और सड़क निर्माण जैसे कार्यों के लिए तीन लाख रुपये की राशि मंजूर की थी।

 

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