बिजली गिरने की भी चेतावनी, बारिश और बर्फबारी से तापमान में गिरावट के साथ बढ़ेगी ठंड
देहरादून। उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम करवट लेने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार 14 से 16 अक्टूबर के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं, ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी के आसार जताए गए हैं। मौसम में आने वाले इस बदलाव के चलते तापमान में गिरावट दर्ज होने और ठंड बढ़ने की उम्मीद है।
मौसम विभाग के अनुसार 14 और 15 अक्टूबर को देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल समेत प्रदेश के कई जिलों में बारिश हो सकती है। 15 अक्टूबर को बारिश का अधिक प्रभाव गढ़वाल मंडल में देखने को मिल सकता है, जबकि 16 अक्टूबर को कुमाऊं मंडल के कुछ जिलों में तेज बारिश होने की संभावना है। मौसम के इस बदलाव को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
12 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून ने 15 अक्टूबर के लिए प्रदेश के 12 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की आशंका जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। ऊधम सिंह नगर और चंपावत को छोड़कर शेष जिलों में मौसम का असर देखने को मिल सकता है। विभाग ने कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी जताई है, जिससे जान-माल के नुकसान का खतरा बना रह सकता है।
ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार
मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार, 14 अक्टूबर को 3,800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है। वहीं, 15 और 16 अक्टूबर को 3,500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात की संभावना है। बारिश और बर्फबारी के बाद पर्वतीय क्षेत्रों के साथ ही प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी तापमान में गिरावट आ सकती है। इससे सुबह और शाम के समय ठंड का असर बढ़ने की उम्मीद है।
चारधाम यात्रा पर जाने से पहले लें मौसम की जानकारी
मौसम विभाग ने लोगों से बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने और पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी यात्रा शुरू करने से पहले मौसम का ताजा पूर्वानुमान और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी देखने की सलाह दी गई है।
गौरतलब है कि बीते दिनों भी प्रदेश के कई जिलों में बारिश हुई थी, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई थीं। ऐसे में मौसम का दोबारा बदलना किसानों, यात्रियों और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।













