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ग्राफिक एरा में पर्वत संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर कार्यशाला

 

देहरादून,  ग्राफिक एरा में विशेषज्ञों ने हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन, पर्वतीय पारिस्थितिकि, जल प्रबंधन और सतत् विकास की गहन बारीकियां साझा की।

ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में उत्तराखंड में जलवायु परिवर्तन और जल संसाधनों की सुरक्षा विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के मुख्य अतिथि आईआईटी रुड़की के डीन ऑफ फाइनेंस एंड प्लैनिंग, डा. दीपक खरे ने कहा कि पर्वतों की संरक्षण का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है पर्वतों का यथार्थपरक विश्लेषण जिससे उनकी वर्तमान स्थिति, कमजोरियों और संभावित खतरों को पूरी तरह समझा जा सके। उन्होंने सतत् विकास पर जोर देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और पर्वतीय क्षेत्रों में जल संसाधनों की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट और टिकाऊ उपाय अपनाना आज की आवश्यकता है।

ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. नरपिंदर सिंह ने कहा कि पर्वतीय इलाकों में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशनों की स्थापना समय की मांग है जो वर्षा, तापमान और जलवायु परिवर्तनों की सटीक जानकारी प्रदान कर वैज्ञानिक अनुसंधान और आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाएंगे।

रुड़की के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी के वैज्ञानिक डा. शक्ति सूर्यवंशी ने कहा कि हिमालय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के कारण तीव्र गति से बदल रहे हैं और इन परिवर्तनों का सीधा प्रभाव पर्वतीय पारिस्थितिकी, जल स्रोतों तथा मानव जीवन पर पढ़ रहा है। डा. शक्ति ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से पिछले 100 वर्षों में हिमालय में आए परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बढ़ते तापमान और पिघलते हिमनदों ने आपदाओं का खतरा बढ़ा दिया है। कार्यशाला में मैनेजमेंट के प्रोफेसर डा. एम. पी. सिंह ने भी संबोधित किया।

कार्यशाला का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट और इंडियन वॉटर रिसोर्सेज सोसायटी-स्टूडेंट चैप्टर ने संयुक्त रूप से किया। कार्यशाला में अल्मोड़ा की एसएसजे यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. सतपाल सिंह बिष्ट, सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एचओडी डा. कीरत कुमार गुप्ता, डा. अजय गैरोला, डा. किशन सिंह रावत, डा. दीपशिखा शुक्ला के साथ अन्य शिक्षा-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डा. नितिन मिश्रा ने किया।

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