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उत्तराखंड के सभी मेडिकल कॉलेजों में हर माह होगी फायर ड्रिल, लापरवाही पर कार्रवाई

By: Naveen Joshi

On: Friday, October 10, 2025 6:19 AM

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देहरादून,  उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में सुरक्षा और फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देशों पर सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्यव्यापी फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। अध्यक्षता सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर. राजेश कुमार ने की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी अस्पतालों में फायर सिस्टम को दुरुस्त किया जाए, प्रत्येक माह इमरजेंसी ड्रिल और सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य रूप से आयोजित हों, तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अजय आर्य, दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन, उप सचिव जसविंदर कौर, सीएमएस डॉ. आर.एस. बिष्ट, तथा यूपीआरएल (U.P.R.L.) के प्रतिनिधि सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार ने दून मेडिकल कॉलेज में फायर सेफ्टी से जुड़ी कार्यदायी संस्था को निर्देश दिया कि अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) शीघ्र प्राप्त किया जाए। उन्होंने स्प्रिंकलर, मोटर्स और अन्य फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच कर उनका डेमो कराए जाने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने कहा कि “राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में हर महीने फायर मॉक ड्रिल अनिवार्य रूप से कराई जाए। कार्यदायी संस्था के साथ नियमित बैठकें हों, ताकि किसी आपात स्थिति में तत्परता सुनिश्चित की जा सके।”

कार्यदायी संस्था ने बताया कि ओटी बिल्डिंग की फायर एनओसी 30 अक्टूबर 2025 तक और सीएसएसडी विभाग की एनओसी 30 नवम्बर 2025 तक हस्तांतरित कर दी जाएगी।

“मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्यभर के सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षा जांच और फायर ड्रिल अभियान को तेज किया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता मरीजों और अस्पताल स्टाफ की सुरक्षा है। सभी अस्पतालों में फायर सिस्टम की मजबूती, इमरजेंसी ड्रिल और सुरक्षा ऑडिट सुनिश्चित किया जाएगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड के अस्पताल पूर्णत: सुरक्षित और आपातकाल के लिए तैयार रहें।”

सभी अस्पतालों में फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम की जांच।

प्रत्येक माह इमरजेंसी ड्रिल और प्रशिक्षण कार्यक्रम।

सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई।

यह अभियान राज्य सरकार की ओर से मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

राज्य सरकार ने दोहराया है कि अस्पतालों में सुरक्षा मानकों को लेकर कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी प्रबंधन को समयबद्ध रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा। सरकार की यह पहल प्रदेश के अस्पतालों को सुरक्षित बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

 

 

 

 

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