देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वैलटिल कैसर हॉस्पिटल मेरठ से आए साइबर नाइफ 7के एक्सपर्ट दिनेश सिंह मेडिकल डायरेक्टर एण्ड रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ० अमित जैन आयरेक्टर रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट में भारत में पहली बार साइबर नाइफ S-7 लांच करने का दावा किया और साइबर नाइफ S-7 के द्वारा कैंसर और नॉन कैन्सर्स बीमारियों के सफल इलाज के बारे में जानकारी प्रदान की।
साइबर नाइक S-7 तकनीक के जरिये शरीर के किसी भी अंग में कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं को हटाकर पीडित शख्स को राहत दिलायी जा सकती है। इस आधुनिक तकनीक ने विभिन्न प्रकार के कैंसर से पीड़ित लोगों के लिए उम्मीदों का उजाला बिखेर दिया है
कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही अनेक लोगों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाती है लेकिन अब इस तरह की सोच गलत साबित हो रही है। पिछले 20 से 22 साली चिकित्सा विज्ञान में तेजी से हुई प्रगति खासकर दूरबीन द्वारा सर्जरी और रोमांटिक रेडियो सर्जरी के प्रचलन में आने से कई प्रकार के बीसरी से छुटकारा पाने में सफलता मिली है जिसका सिलसिला जारी है। इस कारण कैंसर पीडितों को काफी हद तक राहत मिली है। साइबर नाइफ 5-7 के जरिये शरीर के किसी भी ऊग में कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट किया जा सकता है।
अनेक धौसर ऐसे होते हैं, जो एक बार ठीक होने के बाद दोबारा लिवर फेफड़े मस्तिष्क या फिर हड्डियों आदि को निशाना बना लेते हैं। उस समय यदि सर्जरी न की जा सके या दवाओं के इस्तेमाल के बाद भी कुछ अगों में बीमारी के कुछ लक्षण बरकरार हों तो उसे नवीनतम रोबोटिक रेडियो सर्जरी के द्वारा खत्म किया जा सकता है। अगर कैसरग्रस्त ट्यूमर तीन अलग-अलग भागी पर भी है. तब भी इलाज सभव है। साइबर नाइफ द्वारा विभिन्न रोगियों के इलाज से यह बात सावित हो चुकी है कि ओलिगो-मेटास्टेटिक कैंसर यानी तीन या तीन से कम कैंसर की गाठों की रोबोटिक रेडियो सर्जरी करने पर इन्हें पूरी तरह से खत्म करना संभव है। गौरतलब है कि देश में साइबर नाइफ के नवीनतम मॉडल का प्रचलन हाल में ही शुरू हुआ है।
मिल चुकी है मान्यता-
सन् 2002 में अमेरिका के फूड्स एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफ डी.ए.) द्वारा साइबर नाइफ को कैंसर के इलाज के रूप में मान्यता दी जा चुकी है। इसके बाद साइबर नाइफ का प्रयोग फेफड़े के कैंसर की पहली व दूसरी अवस्थाओं के लिए किया गया। जिन रोगियों में अन्य बीमारियो के कारण ऑपरेशन नहीं हो सकता था. उन्हें भी इस इलाज से लाभ पहुंबा। सुखद बात यह थी कि साइबर नाइफ के इलाज से कैंसर की पहली अवस्था से पीडित 80 प्रतिशत रोगियों की बीमारी पर काबू पाने में कामयाबी हासिल हुई थी।
इस तकनीक के अंतर्गत शरीर के अंगों में स्थित विभिन्न प्रकार के कैंसरों को साइबर नाइफ S-7 का रोबोट चिन्हित कर लेता है और फिर विकिरणों (रेडिएशत) द्वारा उन्हें लक्षित करता है ताकि स्वस्थ कोशिकाएं बच जाए। इसका सबसे अधिक लाभ फेफड़े, लिवर व गुर्दे (किडनी) के कैंसर में हो रहा है। इसके अलावा मस्तिष्क व रीढ़ की हक्रियों में स्थित सर या कैसर रहित बनाइन कोइरদ্ধ ৪- 7 बखूबी नष्ट कर देता है।
किडनी के कैंसर का इ
प्राय ऑपरेशन के बाद किडनी से सबंधित कैंसर फेफड़े हड्डी या मस्तिष्क कर जानलेवा बन जाते है। ऐसे सरो के इलाज के लिए साइबर नाइफ 5-7 क स्टेरियो-टकटिक विकिरण (रेडिएशन) आशा की एक नयी किरण जगाता है। कैंसर के कारण पेट के पास स्थित आतरिक अंगों जैसे लिवर व पैनक्रियाज में ट्यूमर होने से उत्पन्न होने वाले दर्द को सर्जरी के बाद भी खत्म नहीं किया सकता। ऐसे पीड़ितों को साइबर नाइफ S-76 से 9 महीनों तक राहत दे सकता है। जिन मरीजों की अतीत में विकिरण चिकित्सा (रेडियोथेरेपी) हो चुकी है. उनके लिए भी यह इलाज एक नया सदेश लेकर आया है।
रीढ़ की हड्डी में कैसर द्वारा पैदा हुए दर्द के लिए भी साइबर नाइफ S-7 एक कारगर इलाज है। यही नही जो रोगी दर्द कम करने वाली दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके लिए दवा की मात्रा साइबर नाइफ S-7 के इस्तेमाल के बाद कम हो जाती है। सच तो यह है कि कैंसर के इलाज में सर्जरी कीमोथेरेपी और रेडियो थेरेपी के सही इलाज के साथ साइबर नाइफ S-7 की नयी तकनीक कैंसर पीड़ितों के लिए उम्मीद का सवेरा बनकर आयी है।
साइवर नाइफ S-7 से उन मरीजों को भी फायदा होगा जो अब तक 30-35 दिन का सामान्य रेडियोथेरेपी अपने कैंसर के इलाज में ले रहे थे। साइवर नाइफ S-7 में वही Treatment Hypo-fraction के द्वारा 10-11 दिन में संभव हो जायेगा। जिससे मरीज के समय और लागत में भी कुछ कमी आयेगी और ईलाज भी बेहतर हो जायेगा।
