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शक्ति का दुरुपयोग मनुष्य को राक्षस बना देता है : स्वामी रसिक महाराज

By: cradmin

On: Friday, January 30, 2026 7:10 PM

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देहरादून, रघुनाथ मंदिर, क्लेमनटाउन में आयोजित नौ दिवसीय देवी भागवत कथा एवं आशीर्वाद कवच महायज्ञ के छठे दिन व्यासपीठ से नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि शक्ति का दुरुपयोग मनुष्य को राक्षस बना सकता है, इसलिए शक्ति का सदैव विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।
स्वामी रसिक महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि शक्ति के नाश के अनेक कारणों में विषय-लोलुपता सबसे बड़ा कारण है। प्रायः देखा जाता है कि शक्तिसंपन्न व्यक्तियों में काम-वासना का विकार उत्पन्न हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप वे अपनी शक्ति को नष्ट कर देते हैं और समाज को भी हानि पहुँचाते हैं।
उन्होंने कहा कि सौंदर्य, शक्ति, यौवन और धन संसार की चार दैवी विभूतियाँ हैं। ईश्वर ने इनका सृजन मानव के उत्थान के लिए किया है, ताकि इनके विवेकशील उपयोग से मनुष्य शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक रूप से उन्नति कर सके। इन दैवी शक्तियों का सदुपयोग मानव व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्वामी रसिक महाराज ने उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान के स्वरूप की कल्पना में हम सौंदर्य, शक्ति और चिरयौवन को महत्त्व देते हैं। जिन महापुरुषों ने इन शक्तियों का विवेकपूर्ण उपयोग किया, उन्होंने निरंतर प्रगति की, किंतु जहाँ इनका दुरुपयोग हुआ, वहीं से पतन आरंभ हो गया।
रावण का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि रावण ब्राह्मण, विद्वान और तपस्वी राजा था, किंतु शक्ति के अहंकार और वासना के कारण वह पतन की ओर बढ़ गया। शक्ति के दुरुपयोग से विवेक दब जाता है, न्याय का गला घुट जाता है और मनुष्य सत-असत का भेद भूल जाता है, जिसका परिणाम अंततः सर्वनाश होता है।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि गायत्री माता शक्ति-स्वरूपिणी हैं और उनकी उपासना से सभी प्रकार की शक्तियाँ प्राप्त की जा सकती हैं, किंतु शर्त यही है कि प्राप्त शक्ति का सदुपयोग किया जाए। शक्ति का दुरुपयोग न केवल सांसारिक पतन का कारण बनता है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी मनुष्य को अत्यंत निम्न स्तर पर पहुँचा देता है।
कथा के छठे दिन  गोविन्द सिंह सांवत, प्रेमा देवी, प्रकाश सिंह रावत, रोशनी देवी, राजवीर पंवार, जानकी देवी, सम्पूर्णानंद मुंडेपी, साध्वी मां देवेश्वरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और प्रवचन का लाभ प्राप्त किया।

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