देहरादून, जनहित से जुड़े मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए सीएचसी रायपुर स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र तथा उसके निकट संचालित निजी मेडिकल स्टोर के औषधि विक्रय लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की है। दोनों संस्थानों का संचालन एक ही व्यक्ति द्वारा किए जाने और जांच में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।
विगत 4 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) रायपुर स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में केंद्र पर दवाओं की उपलब्धता न होने तथा संचालक द्वारा पास ही निजी मेडिकल स्टोर संचालित किए जाने की बात कही गई थी।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल कुमार एवं वरिष्ठ औषधि निरीक्षक ने संयुक्त रूप से मौके पर जांच की। जांच में पाया गया कि जन औषधि केंद्र संचालक बलवीर सिंह रावत द्वारा सीएचसी परिसर के भीतर जन औषधि केंद्र तथा लगभग 25 मीटर दूरी पर मै० रावत मेडिकोज नाम से निजी मेडिकल स्टोर संचालित किया जा रहा था, जिससे स्पष्ट रूप से हितों का टकराव उत्पन्न हो रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि जन औषधि केंद्र में दवाओं की उपलब्धता दर्शाने वाले पीएमबीआई के आधिकारिक सॉफ्टवेयर का वर्षों से उपयोग नहीं किया गया। बिलिंग प्रक्रिया मैनुअल रूप से संचालित की जा रही थी तथा दवाओं की मांग एवं आपूर्ति की प्रक्रिया नियमानुसार पोर्टल के माध्यम से न कर अनौपचारिक रूप से व्हाट्सएप के जरिए की जा रही थी।
दवाओं की कमी दूर करने के लिए नियमानुसार प्रयास न किए जाने के कारण मरीजों को सस्ती दवाओं के स्थान पर निकटवर्ती निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदने के लिए विवश होना पड़ा, जिससे निजी लाभ की स्थिति परिलक्षित हुई।
इसके अतिरिक्त स्टॉक पंजिका एवं इन्वेंट्री का रख-रखाव अव्यवस्थित पाया गया। लाइसेंस निर्गमन एवं नवीनीकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों में भी विसंगतियां मिलीं, जिनमें एक ही रेफ्रिजरेटर बिल का उपयोग, एसी की कार्यशील स्थिति संबंधी गलत घोषणा तथा किरायानामा अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद अद्यतन अनुबंध अपलोड न किया जाना शामिल है।
उपरोक्त अनियमितताओं के आधार पर वरिष्ठ औषधि निरीक्षक द्वारा जनहित में बलवीर सिंह रावत को निर्गत सीएचसी रायपुर स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र एवं निकटवर्ती मै० रावत मेडिकोज के औषधि विक्रय लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की गई, जिस पर कार्रवाई करते हुए दोनों लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जन औषधि केंद्रों के माध्यम से आमजन को सस्ती एवं सुलभ दवाएं उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की अनियमितता या जनहित से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा भविष्य में भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
