देहरादून – भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के प्रांगण में भावनाओं का सागर उमड़ पड़ा। वर्ष 1975 में पासआउट हुए 55वें नियमित और 39वें तकनीकी स्नातक कोर्स के सैन्य अधिकारी एक बार फिर अपने उस प्रशिक्षण स्थल पर लौटे, जहां से उनका सैन्य जीवन प्रारंभ हुआ था। इस स्वर्ण जयंती पुनर्मिलन समारोह में कुल 153 पूर्व सैन्य अधिकारी और सात वीर नारियां सम्मिलित हुईं।समारोह के दौरान पूर्व सैन्य अधिकारियों ने अपने उस कठिन लेकिन गौरवशाली प्रशिक्षण काल को याद किया, जिसने उनमें अनुशासन, नेतृत्व और देशभक्ति का भाव भर दिया था। बीते 50 वर्षों में इन अधिकारियों में से कोई जनरल बना, तो कोई ब्रिगेडियर। अनेक ने युद्धभूमि में अद्भुत वीरता का प्रदर्शन किया, और कई को विशिष्ट सेवाओं हेतु सेना के सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया। समारोह का सबसे भावुक क्षण युद्ध स्मारक पर आयोजित पुष्पांजलि समारोह रहा, जहां वीरगति को प्राप्त अपने साथियों की स्मृति में श्रद्धा-सुमन अर्पित किए गए। इस दौरान कई अधिकारी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाए और उनकी आंखें नम हो गईं।आईएमए के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह ने पूर्व सैन्य अधिकारियों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा:“आईएमए केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि जीवनभर साथ निभाने वाला एक संस्कार है। हमारी पहचान आप सभी से है। हम हर उस अधिकारी पर गर्व करते हैं, जिसने देश और सेना का गौरव बढ़ाया।”कोर्स प्रतिनिधि कर्नल सुखराम चौधरी ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा:
“आज हम फिर उसी धरती पर हैं, जहां से हमारे जीवन की असली यात्रा शुरू हुई थी। यह ऐसा पल है जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।”इस ऐतिहासिक पुनर्मिलन ने यह सिद्ध कर दिया कि एक बार जो आईएमए का हिस्सा बना, वह जीवनभर उस गौरवशाली परंपरा का वाहक बना रहता है।
