देहरादून/नैनीताल। जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए नैनीताल जिले के हरिनगर क्षेत्र में निर्मित 4400 पारंपरिक ‘चाल-खाल’ (जल कुंडों) का भव्य उद्घाटन किया गया। यह महत्वाकांक्षी परियोजना पर्यावरण संरक्षण, भूजल स्तर सुधार, जैव विविधता संवर्धन तथा वन्यजीवों के लिए स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
डॉ. विक्रांत तिवारी की जल संरक्षण परिकल्पना को साकार करते हुए इन चाल-खालों का निर्माण पिछले सात वर्षों से नैनीताल जिले के विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार किया जा रहा है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य वर्षाजल को संरक्षित कर सूखते प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना और जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों को राहत प्रदान करना है।
उद्घाटन समारोह में ओखलकांडा एवं देवीधुरा रेंज के वन दरोगा और वन बीट अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही हरिनगर की ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, महतोली एवं हरिनगर के वन सरपंच सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भागीदारी की।
इस अवसर पर डॉ. विक्रांत तिवारी ने बताया कि उन्होंने उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों में अब तक 2 करोड़ से अधिक वृक्षारोपण कार्य करवाए हैं। उन्होंने कहा कि नैनीताल जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में निर्मित इन 4400 चाल-खालों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 1.5 करोड़ लीटर वर्षाजल का संरक्षण संभव हो सकेगा। इससे क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोतों को मजबूती मिलेगी और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।
समारोह में दीपक सिंह, तिल्लोक सिंह पड़ियार, रेखा देवी, दीपा देवी, कमला देवी, शांति देवी, बिजेन्द्र लाल एवं जीवन कुमार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने क्षेत्र में सूखते जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने वाली इस पहल की सराहना करते हुए डॉ. तिवारी के प्रति आभार व्यक्त किया।
स्थानीय लोगों का मानना है कि पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों को बढ़ावा देने से पहाड़ी क्षेत्रों में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन का मजबूत आधार तैयार करेगी।





