श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिवस पर भक्ति, ज्ञान और दिव्यता का अद्भुत संगम
देहरादून, श्रीमद्भागवत महापुराण की सात दिवसीय दिव्य कथा के अंतर्गत तीसरे दिवस का आयोजन सुभाष नगर स्थित सेठ पन्नालाल ग्राउंड में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। वातावरण पूर्णतः भक्तिमय रहा, जहां कथा श्रवण हेतु बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया।
कथा व्यास आचार्य पवन नंदन महाराज जी ने अपनी ओजस्वी वाणी और गहन आध्यात्मिक व्याख्या से उपस्थित जनसमूह को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। उनके द्वारा प्रस्तुत प्रत्येक प्रसंग न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि जीवन के गूढ़ संदेशों को भी सरलता से जनमानस तक पहुँचाने वाला रहा।
कार्यक्रम के दौरान सती चरित्र का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया। सती के आत्मसम्मान, त्याग और धर्मनिष्ठा की यह कथा नारी शक्ति और आत्मगौरव का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई। आचार्य जी ने बताया कि अन्याय और अपमान के विरुद्ध खड़ा होना ही सच्चे धर्म का पालन है।
इसके उपरांत ध्रुव चरित्र ने विशेष रूप से बच्चों एवं युवाओं को प्रेरित किया। एक बालक की अटूट श्रद्धा, दृढ़ संकल्प और तपस्या ने उसे भगवान की प्राप्ति तक पहुँचाया। यह प्रसंग इस बात का सशक्त संदेश देता है कि सच्ची लगन और विश्वास से असंभव भी संभव हो जाता है।
तीसरे प्रमुख प्रसंग में नृसिंह अवतार का अत्यंत प्रभावशाली वर्णन किया गया। भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और भगवान की कृपा से अधर्म पर धर्म की विजय का यह प्रसंग पूरे वातावरण को ऊर्जा और उत्साह से भर गया। कथा के दौरान “नृसिंह भगवान की जय” के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा।
आयोजन स्थल को भव्य रूप से सजाया गया था तथा ध्वनि, प्रकाश, बैठने की व्यवस्था, प्रसाद वितरण और जल सेवा का उत्कृष्ट प्रबंधन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं एवं बच्चों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
अपने प्रेरणादायी संदेश में आचार्य पवन नंदन महाराज जी ने कहा कि जीवन में केवल धार्मिक अनुष्ठान ही पर्याप्त नहीं, बल्कि सच्चे आचरण, श्रद्धा और विश्वास का समावेश ही वास्तविक साधना है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे सती के आत्मसम्मान, ध्रुव की निष्ठा और प्रह्लाद की अटूट भक्ति को अपने जीवन में अपनाएं।
कार्यक्रम का समापन अत्यंत शांतिपूर्ण, प्रेरणादायक और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण में हुआ। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि समाज को नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुआ।इस अवसर पर संरक्षक विनोद राई अध्यक्ष प्रेम सिंह भंडारी, उपाध्यक्ष अभिषेक परमार, महासचिव नवीन जोशी, कोषाध्यक्ष के. एन. लोहनी, सुमित मेहता, बृज किशोर यादव, मीडिया प्रभारी गणेश सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही मालती राई, प्रमिला नेगी, कादंबरी शर्मा, तारा राई, ममता राई, रेखा यादव, दीपक गोसाईं, एवं प्रदीप राई सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
