Prabhat Chingari
धर्म–संस्कृति

अद्भुत रहस्यों से भरा है कैलाश पर्वत

देहरादून,कैलाश पर्वत को भगवान शंकर का निवास स्थान माना जाता है। यह पर्वत अद्भुत रहस्यों से भरा हुआ है। शिव पुराण, स्कंद पुराण और मत्स्य पुराण में भी कैलाश पर्वत की महिमा बताई गई है। कैलाश पर्वत न केवल हिंदू धर्म में बल्कि जैन, सिख और बौद्ध धर्म में भी कैलाश पर्वत को लेकर अपनी-अपनी मान्यताएं हैं। हिंदू धार्मिक ग्रंथो में माना गया है कि कैलाश की चढ़ाई कोई साधारण व्यक्ति नहीं कर सकता। ऐसे में आइए जानते हैं इसका कारण। कैलाश पर चढ़ाई नहीं कर पाने के पीछे यह कारण माना जाता है कि कैलाश पर भगवान शिव का निवास है। साथ ही यहां केवल देवताओं और पुण्य आत्मा ही निवास कर सकती हैं। माना जाता है कि सिर्फ वहीं व्यक्ति कैलाश पर जाने के योग्य है, जिसने कभी कोई पाप न किया हो। साथ ही कई मान्यताओं के अनुसार, इस पर्वत के चारों ओर एक अलौकिक शक्ति का प्रवाह होता है, जो किसी भी साधारण मनुष्य को यहां आने से रोकता है। इसलिए यह माना जाता है ने कि कोई भी जीवित व्यक्ति कैलाश नाश की
चढ़ाई करने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन सभी अपनी कोशिशों में असफल रहे। कैलाश पर्वत को ब्रह्मांड और धरती के बीच का केंद्र माना गया है। एवरेस्ट के वातावरण की तुलना में कैलाश पर्वत का वातावरण ज्यादा मुश्किल माना गया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार कैलाश पर्वत पर मैग्नेटिक फील्ड ज्यादा सक्रिय है, जिस कारण इसका वातावरण अन्य किसी स्थान के वातावरण से अलग प्रतीत होता है और यही इसकी चढ़ाई को और भी मुश्किल बना देता है। माना जाता है कि 11वीं सदी में एक तिब्बती बौद्ध योगी मिलारेपा ही कैलाश पर्वत की चढ़ाई करने में सफल हुए हैं। वह ऐसा करने वाले विश्व के एकमात्र व्यक्ति माने गए हैं, जो कैलाश पर चढ़ाई करने के बाद जीवित वापिस लौट सके। वहीं जैन धर्म के अनुयायियों का मानना है । कि कैलाश पर्वत पर ही उनके पहले तीर्थंकर ऋषभनाथ को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। वहीं, दूसरी ओर बौद्ध धर्म के अनुयायी यह मानते हैं कि कैलाश पर्वत के शिखर पर ही बुद्ध का निवास है। जो इस बात को दर्शाता है कि कई धर्मों का संबंध कैलाश पर्वत से जुड़ा हुआ है।

Related posts

मुख्यमंत्री ने केदारनाथ पहुंच कर रुद्राभिषेक करने के बाद धाम में चल रहे पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों की समीक्षा ……

prabhatchingari

प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, प्रदेश की खुशहाली की कामना

cradmin

माँ डांटवाली का 222वां वार्षिकोत्सव – भव्य जागरण में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब

cradmin

प्रभु श्रीराम के दर्शन कर मन हुआ अभिभूत,खुद को समझती हूं सौभाग्यशाली-रेखा आर्या

prabhatchingari

परम धर्म संसद में तीन पीठ के शंकराचार्य पहली बार एक साथ एक मंच पर दिखें।*

prabhatchingari

आज का दिन विशेष: पंचांग के साथ जानें सभी राशियों का भविष्यफल

cradmin

Leave a Comment