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विश्व पृथ्वी दिवस पर युवाओं व कंपनियों से किया प्रकृति संरक्षण का आह्वान

देहरादून/नैनीताल: विश्व पृथ्वी दिवस 2025 के अवसर पर aadivasi.org के संस्थापक और पर्यावरणविद डॉ. विक्रांत तिवारी ने नैनीताल जिले के हरिनगर वन पंचायत में आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम में जल और वन संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया।

डॉ. तिवारी, जो पिछले कई वर्षों से उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों में वृक्षारोपण और जल संरक्षण जैसे कार्यों में सक्रिय हैं, अब तक लाखों पेड़ लगा चुके हैं और नैनीताल जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में 2000 से अधिक जल संरचनाएं (चाल-खाल) बनवा चुके हैं। इन प्रयासों से न केवल सूखते जलस्रोतों को पुनर्जीवन मिला है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी बल मिला है।

इस बार उन्होंने 1100 चाल-खाल के निर्माण का लक्ष्य रखा है, जिसकी शुरुआत आज पहले जलस्रोत के निर्माण से की गई। यह कार्य न केवल जल संरक्षण का माध्यम बनेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए सतत आजीविका का साधन भी सिद्ध होगा।

डॉ. तिवारी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने भविष्य की ज़िम्मेदारी स्वयं लें और प्रकृति संरक्षण के माध्यम से स्थायी आजीविका के नए मॉडल खड़े करें। उन्होंने कहा, “हमारे पास समय कम है, लेकिन यदि हम सब मिलकर संकल्प लें, तो हम धरती को बचा सकते हैं और साथ ही रोजगार भी पैदा कर सकते हैं।”

उन्होंने कॉर्पोरेट जगत से भी अपील की कि वे अपने CSR फंड को पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों में लगाएं। “प्रकृति नहीं बचेगी तो व्यापार भी नहीं बचेगा। हमें पर्यावरण को केवल एक दान का विषय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखना होगा,” उन्होंने कहा।

इस पूरी परियोजना को आदिवासी वेलफेयर फाउंडेशन स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वित करेगा। संस्था का उद्देश्य न केवल पारिस्थितिकीय संतुलन स्थापित करना है, बल्कि ग्रामीणों को प्रशिक्षण और आय के अवसर प्रदान करना भी है, जिससे वे अपने पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी सशक्त बन सकें।

कार्यक्रम में स्थानीय ग्राम पंचायत की सरपंच गीता देवी, पूर्व ग्राम प्रधान विजयेंद्र लाल, वर्तमान प्रधान ललित मोहन, राकेश कुमार, जसुली देवी, कमला देवी, रेखा देवी, चंदन जी और अन्य ग्रामीण जन प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

डॉ. तिवारी ने अंत में कहा, “जल है तो जंगल है, जंगल है तो जीवन है। हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना होगा।”

यह परियोजना डॉ. तिवारी के नेतृत्व में पंचायत हरिनगर, स्थानीय समुदाय और आदिवासी वेलफेयर फाउंडेशन के सहयोग से संचालित की जा रही है, जो एक प्रेरक उदाहरण है कि कैसे समाज और प्रकृति साथ मिलकर एक नया भविष्य गढ़ सकते हैं।

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