देहरादून। इस वर्ष मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं के सामने धार्मिक असमंजस की स्थिति बन गई है। आज मकर संक्रांति के साथ माघ कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी भी एक ही दिन पड़ रही है। इससे पहले ऐसा दुर्लभ संयोग वर्ष 2003 में बना था। 23 साल बाद फिर से दोनों पर्व एक साथ आने से श्रद्धालुओं के मन में सवाल है—एकादशी पर चावल वर्जित हैं, जबकि संक्रांति पर खिचड़ी का विशेष महत्व, ऐसे में क्या करें?
धर्मशास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि में चावल का सेवन निषिद्ध माना गया है। वहीं, मकर संक्रांति पर चावल और उड़द दाल से बनी खिचड़ी का दान और सेवन पुण्यदायी बताया गया है। इसी विरोधाभास ने लोगों को उलझन में डाल दिया है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार षटतिला एकादशी तिथि 14 जनवरी को शाम 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। ऐसे में जो श्रद्धालु एकादशी व्रत का पालन कर रहे हैं, उन्हें तिथि समाप्त होने तक चावल से परहेज करना चाहिए। एकादशी के पारण के बाद खिचड़ी का सेवन और दान शास्त्रसम्मत माना गया है और इसमें किसी प्रकार का दोष नहीं लगता।
आज क्या करें, क्या नहीं
पंचांग के अनुसार आज एकादशी के कारण दिन में खिचड़ी न पकाना और न ही उसका दान करना उचित माना गया है। इस दिन तिल, गुड़, तिल का तेल, जौ और ऊनी वस्त्र का दान विशेष पुण्यदायी रहेगा। इसी दिन सूर्य दोपहर 3:22 बजे धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे संक्रांति काल माना जाएगा। इस अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहे हैं, जिससे दान-पुण्य का महत्व और बढ़ जाता है।
15 जनवरी को चावल-खिचड़ी का दान
धर्माचार्यों के अनुसार 15 जनवरी को उदया तिथि मानी जाएगी। इस दिन सूर्य उदय के साथ संक्रांति पर्व का विधिवत पालन किया जा सकता है। जिन श्रद्धालुओं को आज चावल दान को लेकर संशय है, वे 15 जनवरी को खिचड़ी और चावल का दान कर सकते हैं। इस दिन पुण्य काल दोपहर 1 बजकर 32 मिनट तक रहेगा।
त्योहारों में नियमों से ऊपर भावना
कई धर्मशास्त्र विशेषज्ञों का मानना है कि सनातन परंपरा में बड़े पर्व सामान्य व्रत नियमों से ऊपर माने जाते हैं। मकर संक्रांति सूर्य उपासना और दान का महापर्व है, इसलिए श्रद्धा और विश्वास के साथ परंपरा का पालन करना ही सर्वोत्तम माना गया है।
मकर संक्रांति पर प्रमुख धार्मिक कर्म
प्रातः स्नान व सूर्य को अर्घ्य
तिल, गुड़, जौ और दाल का दान
जरूरतमंदों को भोजन
एकादशी पारण के बाद खिचड़ी का सेवन
कुल मिलाकर, इस वर्ष मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ और चावल—दोनों प्रकार के दान का पुण्य अलग-अलग तिथियों में प्राप्त होगा। शास्त्रों के अनुसार नियमों के साथ-साथ भावना और श्रद्धा का भी विशेष महत्व है।
