देहरादून/उत्तरकाशी, शीतकालीन चारधाम तीर्थ-दर्शन यात्रा के तीसरे दिन प्रातः भगवती यमुना जी की शीतकालीन पूजा स्थली सुखीमठ में पूजन-दर्शन के उपरांत परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ‘1008’ जी महाराज बड़कोट पहुँचे। नगर पालिका अध्यक्ष विनोद डोभाल के नेतृत्व में स्थानीय नागरिकों एवं धर्मप्रेमियों ने शंकराचार्य जी का भव्य स्वागत किया। धर्म का मार्ग वही, जिसे आदिशंकराचार्य ने बताया — शंकराचार्य जी सभा को संबोधित करते हुए पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि “हमारे पूर्वज आदिशंकराचार्य ने धर्म-प्राप्ति का जो उत्तम मार्ग बताया है, हमें उसी का अनुकरण करना चाहिए। किसी व्यक्ति या सरकार के कहने से कोई स्थान धाम नहीं हो सकता; धाम वही है जिसे आदिशंकराचार्य भगवान ने परिभाषित किया है।” उन्होंने कहा कि धर्ममार्ग पर चलने के लिए मनुष्य का निष्पाप होना आवश्यक है, और यह भगवती यमुना जी के आशीर्वाद से ही संभव है। बड़कोट से यात्रा आगे बढ़कर उत्तरकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर पहुँची, जहाँ भगवान विश्वनाथ का दिव्य एवं भव्य अभिषेक/पूजन विधि-विधान से सम्पन्न हुआ। मंदिर परिसर में आयोजित सभा में शंकराचार्य जी महाराज ने गौ-संरक्षण पर जोर देते हुए कहा— “जिस सरकार में गाय की रक्षा होती है, वही सरकार देश की सच्ची हितैषी कही जाएगी।”गंगा आरती में सहभाग, इसके पश्चात यात्रा दल पंजाब–सिन्ध क्षेत्र घाट पहुँचा, जहाँ भगवती भागीरथी गंगा जी की महापूजा और गंगा आरती सम्पन्न हुई। समिति अध्यक्ष चन्द्रशेखर भट्ट ने पादुकापूजन कर शंकराचार्य जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।भक्तों ने मंत्रोच्चार एवं दीपों की प्रकाशमय छटा के बीच भव्य गंगा आरती के दर्शन किए।कल मुखीमठ में गंगा पूजन, यात्रा का आगे का कार्यक्रम कल प्रातः मुखीमठ, जो भगवती गंगा जी की शीतकालीन पूजा स्थली है, में गंगा पूजन एवं महाआरती के आयोजन के रूप में सम्पन्न होगा। प्रमुख उपस्थितजन स्वामी हरिब्रह्मेन्द्रानन्द तीर्थ, शारदानन्द महाराज, महंत जयन्त पुरी, सुरेश सेमवाल, भूपी चौहान, डॉ. बृजेश सती, आशुतोष डिमरी, प्रकाश रावत, भास्कर डिमरी, उमेशचन्द्र सती, दिनेश डिमरी, आनंद सती, बाबी पंवार, धर्मेन्द्र नेगी, किशोर दबे, अरविन्द मिश्र सहित अनेक भक्तगण उपस्थित रहे।
