देहरादून। हाल ही में एक निजी सर्वे कम्पनी पी वैल्यू एनालिटिक्स द्वारा जारी की गई NARI-2025 नामक रिपोर्ट ने राजधानी देहरादून को देश के दस असुरक्षित शहरों में शामिल किया था। इस रिपोर्ट को लेकर पहले राज्य महिला आयोग ने इसे तथ्यहीन करार दिया था और अब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने भी स्पष्ट कहा है कि यह सर्वेक्षण पूरी तरह भ्रामक, अधूरा और गलत धारणाओं पर आधारित है। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि सर्वे 31 शहरों में CATI (टेलीफोनिक बातचीत) और CAPI (ऑनलाइन इंटरव्यू) के आधार पर किया गया है। देहरादून में महिलाओं की लगभग नौ लाख आबादी के मुकाबले केवल 400 महिलाओं से इलेक्ट्रॉनिक सम्पर्क कर निष्कर्ष निकालना पूरी तरह असंगत है।देहरादून पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार : अगस्त माह में डायल 112 पर कुल 12,354 शिकायतें आईं, जिनमें से 18% (2287) महिलाओें से सम्बन्धित थीं। इनमें भी 1664 शिकायतें घरेलू विवाद की थीं, जबकि छेड़छाड़/लैंगिक हमले के मामले महज 11 दर्ज हुए।यानी महिला अपराधों में छेड़छाड़ की शिकायतें कुल मामलों का 1% से भी कम हैं। पुलिस का औसत रिस्पांस टाइम मात्र 13.33 मिनट है।
एसएसपी ने बताया कि गौरा शक्ति एप पर अब तक 1.25 लाख महिलाएं पंजीकृत हैं, जिनमें से 16,649 रजिस्ट्रेशन केवल देहरादून के हैं। इसके अलावा डायल 112, सीएम हेल्पलाइन, सिटीजन पोर्टल जैसी सेवाओं का महिलाएं लगातार लाभ उठा रही हैं। शहर में स्मार्ट सिटी के 536 और पुलिस कंट्रोल रूम के 216 समेत कुल 14 हजार सीसीटीवी कैमरे सक्रिय हैं।भीड़भाड़ वाले इलाकों में पिंक बूथ स्थापित हैं, 13 गौरा चीता वाहन चल रहे हैं और महिला हेल्प डेस्क व वन स्टॉप सेंटर संचालित हो रहे हैं।
आत्मरक्षा शिविरों के साथ शैक्षणिक संस्थानों में भी लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं
सर्वे में ही पुलिस पैट्रोलिंग के मानक पर देहरादून का स्कोर 33 प्रतिशत है, जबकि ‘सर्वाधिक सुरक्षित’ बताए गए कोहिमा का स्कोर मात्र 11 प्रतिशत है। सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न के मामलों में राष्ट्रीय औसत 7 प्रतिशत है, जबकि देहरादून का 6 प्रतिशत। यानी सर्वे के अपने ही आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं देहरादून में अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं।
एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि देहरादून का अपराध दर मेट्रो शहरों की तुलना में काफी कम है। यहां देश-विदेश के हजारों छात्र-छात्राएं सुरक्षित माहौल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और बड़ी संख्या में पर्यटक सालभर आते हैं। यह सब अपने आप में प्रमाण है कि देहरादून सुरक्षित है।
उन्होंने कहा कि हम सर्वेक्षण के निष्कर्षों का सम्मान करते हैं, लेकिन नीतिगत निर्णयों के लिए आवश्यक है कि सर्वे की पद्धति वैज्ञानिक, पारदर्शी और वास्तविक आंकड़ों पर आधारित हो। अधूरी जानकारी और धारणाओं पर आधारित रिपोर्ट से महिलाओं में भ्रम फैलाना उचित नहीं।
