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श्री सत्य साईं मंदिर में स्टडी सर्कल, आध्यात्मिक चेतना और सेवा भावना पर हुआ मंथन

देहरादून। भगवान श्री सत्य साईं बाबा की दिव्य कृपा एवं आशीर्वाद से श्री सत्य साईं मंदिर, सुभाष नगर, देहरादून में एक भव्य एवं सुव्यवस्थित स्टडी सर्कल (अध्ययन सत्र) का सफल आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, साधकों एवं साईं भक्तों ने सहभागिता की और आत्मिक शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं गणपति प्रार्थना के साथ हुआ। प्रारंभ से ही मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण, शांति और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत रहा।

राज्य आध्यात्मिक समन्वयक डॉ. लता सिंघल ने ज्योति ध्यान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को लगभग 15 मिनट तक ज्योति ध्यान का व्यावहारिक अभ्यास कराया। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि ज्योति ध्यान एक प्रभावशाली साधना पद्धति है, जो मन को एकाग्र करती है, तनाव एवं मानसिक अशांति को दूर करती है तथा व्यक्ति को अपने अंतःकरण और आत्मिक चेतना से जोड़ने में सहायक होती है।

इसके पश्चात संयुक्त आध्यात्मिक समन्वयक  राम अवतार ने उत्तराखंड राज्य में संचालित विभिन्न ऑनलाइन आध्यात्मिक कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक लोग घर बैठे आध्यात्मिक शिक्षा, साधना एवं साईं संदेशों से जुड़ सकते हैं।

राज्य वेद समन्वयक  विजय लक्ष्मी बहुगुणा ने वेद मंत्रोच्चार के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए एक वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं। वेदों का नियमित पाठ एवं चिंतन शारीरिक, मानसिक और आत्मिक कल्याण के साथ-साथ समाज में सद्भाव, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

इस अवसर पर कैप्टन अजय स्वरूप, उपाध्यक्ष (उत्तराखंड राज्य), श्री सत्य साईं सेवा संगठन ने सेवा के महत्व पर प्रेरणादायी वक्तव्य दिया। उन्होंने भगवान श्री सत्य साईं बाबा के संदेश “लव ऑल, सर्व ऑल” को जीवन का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि निःस्वार्थ सेवा और प्रेम न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं, बल्कि समाज में सहयोग, करुणा और एकता की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने सभी भक्तों को अधिक से अधिक सेवा कार्यों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

डॉ. बीना जोशी ने ज्ञान मार्ग एवं भक्ति मार्ग—इन दोनों आध्यात्मिक पथों पर सारगर्भित विचार रखे। उन्होंने बताया कि ईश्वरत्व संपूर्ण प्रकृति में व्याप्त है और प्रत्येक जीव में उसी दिव्यता का अंश विद्यमान है। साथ ही उन्होंने उत्तराखंड की पारंपरिक कुमाऊँनी होली के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पक्ष पर भी प्रकाश डाला, जो वसंत ऋतु, उल्लास, सामूहिक आनंद और जीवन के उत्सव का प्रतीक है।

कार्यक्रम का समापन सामूहिक भजनों एवं मंगल आरती के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने इस अध्ययन सत्र को अत्यंत प्रेरणादायी एवं आत्मिक शांति प्रदान करने वाला बताया। आयोजकों ने भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक एवं सेवा-प्रधान कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन का संकल्प व्यक्त किया।

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