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धर्म–संस्कृति

गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने हेतु स्वामी शंकराचार्य अवि मुक्तेश्वरानन्द 25 अक्टूबर को दून में स्थापित करेंगे गौ ध्वज

देहरादून, सनातन धर्म में वेद, उपनिषद्, पुराणों सहित समस्त धर्मशास्त्रों में गौ की महिमा गाई गई है। गाय को पशु नहीं अपितु माता की प्रतिष्ठा दी गई है। यही सनातन घर्मी हिन्दुओं की पवित्र भावना है, आस्था है इसी धार्मिक आस्था हेतु संविधान एवं कानून में गाय को राज्य सूची से हटाकर केन्द्रीय सूची में प्रतिष्ठित कर गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने तथा गौ हत्या मुक्त भारत बनाने के लिए सम्पूर्ण भारत में गौ प्रतिष्ठा आन्दोलन चलाया जा रहा है।
इसी परिपेक्ष में 25 अक्टूबर को गौ ध्वज को स्थापित कर गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने हेतु स्वामी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः जी देहरादून पहुंचेंगे ।
इस ऐतिहासिक यात्रा की पूर्व तैयारी हेतु दून में पहुंचे यात्रा के राष्ट्रीय सह-संयोजक तथा उत्तराखण्ड़ राज्य के प्रभारी गोभक्त विकास पाटनी और अखिलेश ब्रह्मचारी ने स्थानीय प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया।
स्थानीय प्रेस क्लब पत्रकार से रूबरू होते हुये गोभक्त विकास पाटनी ने कहा कि स्वतन्त्रता प्राप्ति के पूर्व से ही निरन्तर गौमाता की प्रतिष्ठा एवं रक्षा के प्रयास होते रहे हैं। 1966 के धर्म सम्राट यतिचक्रचूडामणि पूज्य करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में हुआ गौरक्षा आंदोलन है, जिसके लिए हजारों गौ भक्तों का बलिदान हुआ था। इसी क्रम में गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाकर गोहत्या मुक्त भारत बनाने हेतु परम गोभक्त पूज्य गोपाल मणि महाराज ने कई बार राज्यों की राजधानी से लेकर देश की राजधानी तक लाखों गौभक्तों के साथ गौप्रतिष्ठा आन्दोलन का नेतृत्व कर देश भर में इसे जीवन्त रखा तथा इस पवित्र अभियान में चारों पीठों के जगद्‌गुरू शंकराचार्यो का आशीर्वाद प्राप्त किया। चारों पीठों के पूज्य जगद्‌गुरू शंकराचार्यों द्वारा अभिषिंचित एवं समर्थित गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने एवं गौहत्या बन्दी कानून हेतु देश में गौ संसद् का आयोजन हुआ जिसमें रामा गौ प्रतिष्ठा संहिता बिल सहित 42 बिन्दु का धर्मादेश भी पारित किया जा चुका है। गौ प्रतिष्ठा के इस अभियान को प्रज्वलित करने हेतु गौ घृत की ज्योति को प्रकाशित कर ज्योर्तिमठ के परम पूज्य जगद्‌गुरू शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः महाराज जी इस आन्दोलन का निर्देशन कर रहे हैं जिन्होंने 14 मार्च से लेकर 28 मार्च 2024 तक नंगे पैर गोवर्धन से दिल्ली तक पदयात्रा भी की। पूज्य जगद्गुरू ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य जी के निर्देशन में आज गौ प्रतिष्ठा का अभियान निरन्तर देश भर में गतिमान है जिन्होंने इस संवत्सर को गौ संवत्सर के रूप में घोषित भी किया है। पूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्‌गुरू शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः जी के निर्देशन एवं नेतृत्व में सम्पूर्ण भारत में गौ प्रतिष्ठा आन्दोलन के अन्तर्गत गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा दिनांक 22 सितम्बर से 26 अक्टूबर तक होनी निश्चित हुई है जो भारत के समस्त 36 प्रदेशों की राजधानियों में पहुंचकर वहाँ एक गो ध्वज की स्थापना कर रही है।
गौ प्रतिष्ठा आन्दोलन के संयोजक परम् पूज्य गोपाल मणि जी महाराज भी पूरे समर्पण और शक्ति के साथ यात्रा की सफलता हेतु प्राण-प्रण से शंकराचार्य जी के साथ हर कदम में साथ चल रहे हैं। प्रत्येक राज्य की राजधानियों में विशाल गो प्रतिष्ठा सम्मेलन का दिव्य भव्य आयोजन हो रहा है जिसका श्रीगणेश गोरक्षक, गौभक्त भगवान् श्रीराम जी की राजधानी अयोध्या से हुआ जहाँ भगवान् रामलला के रूप में विद्यमान हैं, जहाँ से यह पूर्व, पश्चिम, दक्षिण, उत्तर होते हुए 26 अक्टूबर को देश की राजधानी दिल्ली होगी तथा 27 अक्टूबर को यह यात्रा वृंदावन में विराम लेगी। इस यात्रा के माध्यम से पूज्य जगद्‌गुरू शंकराचार्य जी द्वारा समस्त भारत के प्रखर गोभक्तों को सम्मानित भी किया जा रहा है।
इसी क्रम में देवभूमि उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून में पूज्य जगद्‌गुरू शंकराचार्य स्वामी श्रीः अति मुक्तेश्वरानन्दः जी एवं पूज्य गोपाल मणि महाराज जी 25 अक्टूबर 2024 को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक गो ध्वज की स्थापना, गो महासभा को सम्बोधित करेंगे। इसके उपरान्त वो अग्रिम यात्रा हेतु देश की राजधानी दिल्ली को प्रस्थान करेंगे।
इस गो ध्वज स्थापना भारत यात्रा का लक्ष्य सम्पूर्ण भारत में गो प्रतिष्ठा आन्दोलन हेतु समस्त राष्ट्र के गोभक्त हिन्दुओं को जागृत कर एक सूत्र में पिरोने का है तथा गोमाता की दुर्गति, गौ हत्या के कलंक को मिटाकर, पशु सूची के अपमान से हटाकर राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाना है। यात्रा का सुखद परिणाम देखिए यात्रा मुंबई पहुंचते ही महाराष्ट्र की सरकार ने भारतीय गौमाता को राज्यमाता का संवैधानिक दर्जा दे दिया है। देवभूमि उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश के बाद अब महाराष्ट्र गौ को माता की प्रतिष्ठा देने वाला तीसरा राज्य बन गया है। इस गो ध्वज स्थापना पद यात्रा का सूत्रवाक्य है: गौमाता, राष्ट्रमाता राष्ट्रमाता, भारतमाता। गो ध्वज स्थापना भारत यात्रा के उपरान्त देश की राजधानी दिल्ली में गोपाष्टमी के अवसर पर 7, 8 और 9 नवम्बर को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी गो प्रतिष्ठा महा सम्मेलन होगा जो भारत की सरकार को गौहत्या के कलंक को मिटाकर गौमाता को राष्ट्रमाता की प्रतिष्ठा दिलाने हेतु निर्णायक होगा।
इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं भारतीय गौ क्रान्ति मंच संरक्षक बलबीर सिंह पंवार, भारतीय गौ क्रान्ति मंच के प्रदेश अध्यक्ष शूरवीर सिह, महासचिव यशवंत सिंह रावत, आनन्द सिंह रावत, रविन्द्र सिंह राणा, तेजराम एवं भारतीय गौ क्रांति मंच के कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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