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जीवन में ऊँचाइयाँ पाने के लिए गलतियों से सीख जरूरी — स्वामी रसिक महाराज

 

देहरादून। क्लेमनटाउन स्थित रघुनाथ मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय देवी भागवत कथा एवं आशीर्वाद कवच महायज्ञ के चौथे दिन व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि बीते समय में हुई गलतियों को बदला नहीं जा सकता, लेकिन उनसे सीख लेकर भविष्य को अवश्य संवारा जा सकता है। आत्मावलोकन और स्वनिरीक्षण के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि गलती करना कोई पाप नहीं है, परंतु उसी गलती को बार-बार दोहराना अवश्य ही नकारात्मक है। महापुरुषों के वचनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अंधा वह नहीं जिसकी आंखें नहीं होतीं, बल्कि अंधा वह है जिसे अपनी गलती दिखाई नहीं देती। अपनी भूलों को न पहचान पाना ही प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बनता है।

उन्होंने कहा कि जीवन में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति कुछ समय स्वयं के साथ बिताए और आत्ममंथन करे। यद्यपि पीछे मुड़कर देखने से कोई विशेष लाभ नहीं होता, परंतु उन अनुभवों को याद रखना चाहिए जिनसे ठोकर खाकर जीवन में सीख मिली हो।

स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि अपनी गलतियों को न दोहराते हुए, समय के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ना और जीवन को आदर्श बनाना ही सच्चे अर्थों में कथा श्रवण का उद्देश्य है।

आज की कथा में मुख्य यजमान  कमला रावत,  विनोद राई,भूपेन्द्र सिंह, विमल रावत, वीरेंद्र पाण्डेय, पूनम पांडे, महावीर पंत, रवि जोशी, मंजू कोटनाला, गोल्डी नौटियाल, मोहित पंत, दमयंती जुयाल, अजय कोठारी सहित बड़ी संख्या में सनातनी श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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