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उत्तराखंड राज्य जनजातीय महोत्सव 2025 धूमधाम से हुआ संपन्न

देहरादून, परेड ग्राउंड में आयोजित उत्तराखंड राज्य जनजातीय महोत्सव 2025 शानदार तरीके से संपन्न हुआ। समापन समारोह में उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक रोहित चौहान और जितेंद्र टोमक्याल की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनके कर्णप्रिय लोकगीतों ने तीन दिवसीय इस भव्य महोत्सव का सांस्कृतिक समापन किया।

समापन समारोह में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी मुख्य अतिथि रहे, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजपुर विधायक खजान दास ने की।

राज्य जनजातीय शोध संस्थान द्वारा आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति को बढ़ावा देना, कलाकारों को एक मंच प्रदान करना और जनजातीय समुदायों में गर्व और एकता की भावना पैदा करना था। इस आयोजन में उत्तराखंड के साथ-साथ सात अन्य राज्यों के जनजातीय समूहों ने भी भाग लिया, जिन्होंने अपनी पारंपरिक नृत्य शैलियों, शिल्पकला और पारंपरिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया।

महोत्सव के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए गणेश जोशी ने कहा, “देश की समग्र प्रगति के लिए जनजातीय समुदाय का विकास अत्यंत आवश्यक है। मैं हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करता हूं, जिन्होंने जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण और उत्थान के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं। ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारे युवा और गतिशील मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में, उत्तराखंड ने कई ऐतिहासिक पहल की हैं। उनके नेतृत्व में राज्य द्वारा लागू की गई सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) है, जिससे उत्तराखंड ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

उन्होंने कहा, “यह जनजातीय महोत्सव हर वर्ष और अधिक भव्यता के साथ आयोजित हो रहा है और इसका विकास निरंतर हो रहा है। इसमें बढ़ती हुई भागीदारी और उत्साह जनजातीय संस्कृति के प्रति गहरी जड़ें रखने वाले गर्व को दर्शाता है तथा यह ऐसे प्रयासों की सफलता को दर्शाता है, जो समुदायों को एकजुट करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।”

सांस्कृतिक संध्या में रोहित चौहान और जितेंद्र टोमक्याल ने ‘मेरी बसंती’, ‘रेशमी रुमाल’, ‘धना’ और ‘छलिया’ जैसे लोकप्रिय लोकगीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शकों ने तालियों और उत्साह के साथ इन शानदार प्रस्तुतियों का आनंद लिया।

पूरे दिन महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। पारंपरिक जनजातीय नृत्य, शिल्प प्रदर्शनियों और देशी व्यंजनों के स्टॉल्स ने इस महोत्सव को एक अनूठा अनुभव बना दिया। विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर का प्रदर्शन किया, जिससे यह महोत्सव और भी समृद्ध हो गया।

अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए, टीआरआई उत्तराखंड के समन्वयक, राजीव कुमार सोलंकी ने कहा, “यह महोत्सव हमारे मुख्यमंत्री की दूरदृष्टि का हिस्सा है। उन्होंने हमें आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है। इसी कड़ी में, उन्होंने हर वर्ष एक वार्षिक आदिवासी महोत्सव आयोजित करने की घोषणा की, जिसमें सभी आदिवासी समुदायों को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है। उनके मार्गदर्शन में, हमारा विभाग केवल सांस्कृतिक संरक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेल और विज्ञान जैसे अन्य क्षेत्रों में भी प्रयासों का विस्तार किया है। मुख्यमंत्री ने खेल और विज्ञान के क्षेत्र में नई पहल पर बल दिया है, जिसके तहत वार्षिक ‘आदिवासी खेल और विज्ञान महोत्सव’ का आयोजन किया जाता है, ताकि युवा प्रतिभाओं को मंच मिल सके। इसके अलावा, उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें टीआरआई परिसर में एक ई-स्टूडियो स्थापित किया गया है, जो दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों के लिए सैटेलाइट लर्निंग के माध्यम से शिक्षा उपलब्ध कराएगा। साथ ही, उनके नेतृत्व में इस वर्ष एक रोजगार पहल भी शुरू की गई है, जिसमें हर साल आदिवासी समुदाय के लिए ₹1 करोड़ के रोजगार अवसर उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई गई है।”

इस अवसर पर अपर सचिव मुख्यमंत्री एस एस तौलिया, टीआरआई उत्तराखंड के अपर निदेशक योगेंद्र रावत, अन्य गणमान्य अतिथि और बड़ी संख्या में सांस्कृतिक प्रेमी उपस्थित रहे।

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