देहरादून, उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आगामी 27 जनवरी 2026 को प्रदेशभर में ‘समान नागरिक संहिता दिवस’ मनाया जाएगा। इस अवसर पर संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह (ऑडिटोरियम), नीबूंवाला, देहरादून में एक भव्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करेंगे।
यूसीसी दिवस के आयोजन की तैयारियों को लेकर मंगलवार को मुख्य विकास अधिकारी श्री अभिनव शाह की अध्यक्षता में वर्चुअल माध्यम से विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सीडीओ ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम की समस्त व्यवस्थाएं समयबद्ध, सुव्यवस्थित एवं गरिमामय ढंग से सुनिश्चित की जाएं।
कार्यक्रम के दौरान राज्य स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों एवं गणमान्य नागरिकों को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम को जनसहभागिता से जोड़ने के उद्देश्य से ऑन-द-स्पॉट क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा।
मुख्य विकास अधिकारी ने संयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा को निर्देशित किया कि प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में विधि (कानून) की पढ़ाई कर रहे छात्रों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। वहीं शिक्षा अधिकारी को यूसीसी दिवस के संदर्भ में विद्यालयों में निबंध, वाद-विवाद एवं चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित कराने तथा विजेता विद्यार्थियों के कार्यक्रम स्थल तक आवागमन की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
कार्यक्रम में बार काउंसिल एवं स्थानीय बार एसोसिएशन के प्रमुख पदाधिकारियों को भी आमंत्रित किया जाएगा।
लोक निर्माण विभाग को मंच, सभागार, साउंड सिस्टम, एलईडी स्क्रीन एवं टेंटेज की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं पुलिस अधीक्षक को सुरक्षा, यातायात एवं वाहन पार्किंग व्यवस्था सुदृढ़ रखने को कहा गया है। परियोजना निदेशक को आमंत्रित अतिथियों को समय से निमंत्रण पत्र वितरित करने के निर्देश दिए गए।
इसके अतिरिक्त जलपान, पेयजल, विद्युत, परिवहन एवं स्वास्थ्य सेवाओं सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए संबंधित नोडल अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
समान नागरिक संहिता दिवस का यह राज्य स्तरीय आयोजन उत्तराखंड की ऐतिहासिक पहल को जन-जन तक पहुँचाने तथा सामाजिक समरसता, समानता और न्याय के संदेश को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।
