देहरादून। राजधानी में उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब प्रधानमंत्री Narendra Modi के दौरे के दौरान कांग्रेस के प्रदेश सचिव लक्की राणा समेत कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
जानकारी के अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ता उत्तराखंड की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। विशेष बात यह रही कि लक्की राणा स्वयं हाथ में भारतीय संविधान लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने ओएनजीसी चौक से पहले ही उन्हें रोक लिया और हिरासत में ले लिया।
यह घटना उस दिन हुई जब देशभर में Ambedkar Jayanti मनाई जा रही थी और Dr. B. R. Ambedkar के संविधान एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को याद किया जा रहा था।
ज्ञापन में प्रदेश की प्रमुख समस्याओं को उठाया गया था, जिनमें कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा, नशे का बढ़ता जाल, पुलिस कर्मियों की 4600 ग्रेड पे की मांग, बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे अहम मुद्दे शामिल थे।
कांग्रेस कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे थे, लेकिन भारी पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया और लक्की राणा सहित कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर कैंट कोतवाली ले जाया गया।
हिरासत के दौरान एक और गंभीर आरोप सामने आया है। लक्की राणा ने बताया कि कैंट कोतवाली में पानी मांगने पर एक पुलिसकर्मी द्वारा उनके साथ अभद्र और अमर्यादित व्यवहार किया गया। उन्होंने इस घटना को संविधान से जोड़ते हुए कहा, “जिस संविधान को मैं हाथ में लेकर चल रहा था, वही हमें सम्मानपूर्वक जीवन जीने और गरिमा का अधिकार देता है। अगर एक जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार होता है, तो आम जनता के साथ क्या होता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि संविधान में निहित मूल अधिकारों का भी उल्लंघन है। लक्की राणा ने कहा, “मैं संविधान लेकर निकला था ताकि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख सकूं, लेकिन मुझे रास्ते में ही रोककर गिरफ्तार कर लिया गया, यह लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है।”
उनके साथ महानगर महामंत्री अरुण बलूनी, पूर्व पार्षद प्रत्याशी कौलागढ़ देवकी बिष्ट, विजय प्रसाद भट्टाराई, पिया थापा, रौनक, चंद्रमोहन रावत, गौरव, सौरव और आदिल भी मौजूद थे।
