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हमें “सारथी” बनकर कार्य करना चाहिए, “स्वार्थी” नहीं — आचार्य सौरभ सागर

By: cradmin

On: Thursday, July 10, 2025 7:27 AM

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देहरादून,  आचार्य सौरभ सागर महाराज ने कहा कि हमें जीवन में सारथी बनकर काम करना चाहिए, स्वार्थी बनकर नहीं। उन्होंने कहा कि जब तक समाज, परिवार और राष्ट्र में एकता नहीं होगी, तब तक प्रगति संभव नहीं है। एकता की कमी पतन का कारण बनती है – चाहे वह समाज हो, परिवार हो या राष्ट्र।

आचार्य सौरभ सागर महाराज बुधवार को गांधी रोड स्थित श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर एवं जैन भवन में पुष्य वर्षायोग 2025 के 31वें चातुर्मास मंगल कलश स्थापना अवसर पर प्रवचन दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि जैन समाज में समन्वय और एकता की असीम क्षमता है। छह वर्षों से निरंतर संपर्क में रहने वाले लोगों व परिवारों को उन्होंने बधाई देते हुए कहा कि अगर राजनैतिक सहयोग प्राप्त हो, तो किसी भी तीर्थ स्थल या मंदिर को कोई क्षति नहीं पहुँच सकती।

चातुर्मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह आयोजन नई पीढ़ी को संस्कार देने का उत्तम अवसर है। कलश स्थापना समाज की सामूहिक आस्था और समर्पण का प्रतीक होती है।

इस अवसर पर सौरभसागर महिला समिति द्वारा मंगलाचरण और सौरभ सागर बालिका मंडल द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किए गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ महापौर सौरभ थपलियाल, विधायक खजानदास एवं विशाल गुप्ता द्वारा भगवान महावीर स्वामी व गणाचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के चित्र का अनावरण और दीप प्रज्वलन कर किया गया।

इस अवसर पर मुख्य मंगल कलश का सौभाग्य अमित जैन व दीपा जैन को प्राप्त हुआ। इसके साथ ही आशीष जैन, सीमा जैन, सम्यक जैन, अलौकिता जैन, सृष्टि जैन, दीप्तांश जैन, वैभव जैन, आंचल जैन एवं दिल्ली निवासी सुनील जैन को भी चातुर्मास कलश प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम का संचालन पंडित संदीप जैन ने किया। विजय कुमार एवं राजीव कुमार जैन द्वारा भोजन की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम में लखनऊ, दिल्ली, गाजियाबाद, रुड़की और बरेली सहित देशभर से बड़ी संख्या में गुरुभक्त उपस्थित रहे।

 

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