देहरादून। उत्तराखंड सरकार आगामी महाकुंभ के मद्देनज़र एक ऐतिहासिक निर्णय की दिशा में आगे बढ़ रही है। हरिद्वार और ऋषिकेश के नगर निगम क्षेत्र सहित पूरे कुंभ क्षेत्र को ‘पवित्र सनातन नगरी’ घोषित करने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है।
प्रस्ताव के लागू होते ही पैड़ी सहित हरिद्वार के 105 गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लग जाएगा। यह व्यवस्था नगर निगम के धार्मिक बायलाज के तहत लागू की जाएगी, जो देश में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर प्रभावी होगी।, देश में पहली बार इतने बड़े स्तर पर धार्मिक बायलाज, कुंभ मेला प्राधिकरण द्वारा हाल ही में कराए गए सर्वे में हरिद्वार में कुल 105 गंगा घाट चिह्नित किए गए हैं। श्री गंगा सभा और संत समाज लंबे समय से मांग कर रहे थे कि सभी घाटों पर एकसमान धार्मिक नियम लागू किए जाएं। सरकार अब कुंभ के दौरान पूरी तीर्थ नगरी में घाट-स्तर पर समान व्यवस्था लागू करने जा रही है। 120 से 150 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लागू होंगे नियम प्रस्तावित प्रतिबंध हरिद्वार से ऋषिकेश तक गंगा नदी के किनारे लगभग 45–50 किलोमीटर क्षेत्र में लागू होगा। कुल मिलाकर करीब 120 से 150 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र इसके दायरे में आएगा। इसमें नगर निगम क्षेत्र, प्रमुख तीर्थ स्थल, मठ, मंदिर, आश्रम, धर्मशालाएं और अखाड़े शामिल होंगे, जहां गैर-सनातन व्यक्तियों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। 1916 के ऐतिहासिक समझौते की तर्ज पर निर्णय, यह निर्णय पूरी तरह नया नहीं है। वर्ष 1916 में भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय ने ब्रिटिश शासन के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया था, जिसका उद्देश्य गंगा की अविरलता और तीर्थ नगरी की पवित्रता को बनाए रखना था। उस समझौते में भी गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश और स्थायी निवास पर रोक का प्रावधान था। श्री गंगा सभा आज भी इन परंपरागत नियमों का पालन करवाती है। इसके अनुसार गैर-हिंदू केवल कार्यवश हरिद्वार-ऋषिकेश आ सकते हैं और कार्य पूर्ण होने के बाद उन्हें लौटना होता है। अब राज्य सरकार इन्हीं प्रावधानों को कानूनी रूप से और अधिक सख्ती से लागू करने जा रही है।
